लीबिया के ग्रेंड मुफ्ती ने गज़्ज़ा की मदद को वाजिब बताते हुए कहा कि अरब शासकों ने मुस्लिम उम्मह को बंदी बनाया हुआ है जबकि ज़ायोनी शासन और अमेरिका के निरंतर बर्बर आक्रमण के कारण गज़्ज़ा पट्टी के निवासियों की पीड़ा बढ़ती जा रही है।
अल-ग़रीयानी ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र संघ की संस्थाओं की रिपोर्ट गज़्ज़ा पट्टी में अकाल और भुखमरी की पुष्टि करती है, लेकिन अमेरिकी राष्ट्रपति और ज़ायोनी शासन इस वास्तविकता से इनकार करते हैं।
अल-ग़रीयानी ने स्पष्ट किया कि अमेरिका इस अपराध में ज़ायोनी शासन का सबसे बड़ा साझेदार और समर्थक है, जबकि अरब देशों के जलील शासकों में इस बारे में बोलने की हिम्मत भी नहीं है।
लीबिया के मुफ्ती ने जोर देकर कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प यूक्रेन और रूस के बीच शांति की बात करते हैं, लेकिन निर्दोष लोगों के नरसंहार और ज़ायोनी शासन द्वारा गज़्ज़ा पर हमलों को तेज करने पर आँखें मूंद लेते हैं।
उन्होंने अरब शासकों को संबोधित करते हुए कहा कि गज़्ज़ा में जो कुछ हो रहा है वह आप पर और आपके शासकों पर एक कलंक है; एक ऐसा कलंक जिसे कुछ भी साफ नहीं करेगा।
लीबिया के मुफ्ती ने अंत में जोर देकर कहा कि इस्लामी दुनिया पर गज़्ज़ा की नाकाबंदी को तोड़ने के लिए सैकड़ों और हजारों जहाज भेजना वाजिब है; मुसलमानों के लिए यह शर्म की बात है कि वह गज़्ज़ा में हो रहे अत्याचारों को देखें और कुछ न करें।
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