अहले-बैत अंतरराष्ट्रीय समाचार एजेंसी (अबना) की रिपोर्ट के अनुसार, आले -खलीफा शासन के सुरक्षा बलों ने आज सुबह बहरैन के विभिन्न क्षेत्रों में शिया उलमा के घरों पर बड़े पैमाने पर छापेमारी की और दर्जनों उलमा को गिरफ्तार कर लिया है। इसे पर्यवेक्षकों ने शिया समुदाय के व्यवस्थित दमन और क्षेत्रीय घटनाक्रमों के बीच सुरक्षा माहौल को और सख्त करने की नीति का हिस्सा बताया है।
स्थानीय स्रोतों और बहरैन के कार्यकर्ताओं के अनुसार, सुरक्षा बल बिना किसी स्पष्ट अदालत के आदेश के घरों में घुसे, तलाशी ली, कई उलमा को गिरफ्तार किया और उनकी कुछ निजी संपत्तियां भी जब्त कर लीं। हालांकि आले -खलीफा शासन ने अभी तक इस कार्रवाई का आधिकारिक विवरण जारी नहीं किया है, लेकिन बहरैन के सूत्रों के अनुसार “दर्जनों” शिया विद्वानों को हिरासत में लिया गया है, जिनमें से कई पहले भी पूछताछ, धमकी या सुरक्षा दबाव का सामना कर चुके हैं।
यह कार्रवाई ऐसे समय हुई है जब ईरान के साथ युद्ध शुरू होने के बाद से बहरैन में शियाओं के खिलाफ गिरफ्तारियों और सुरक्षा कार्रवाइयों में वृद्धि देखी जा रही है। मानवाधिकार संगठनों जैसे बहरैन इंस्टीट्यूट फॉर डेमोक्रेसी एंड ह्यूमन राइट्स (BIRD) और अल-अमल सेंटर के अनुसार, पिछले दो महीनों में 200 से अधिक लोगों को गिरफ्तार किया गया है। इसी संदर्भ में बहरैन के गृह मंत्रालय ने आज दावा किया कि उसने 41 लोगों को “ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स से संबंध” के आरोप में गिरफ्तार किया है। मंत्रालय ने बिना कोई ठोस सबूत दिए कहा कि एक “आईआरजीसी से जुड़ा समूह” पकड़ा गया है और जांच में ऐसे मामलों को भी शामिल किया गया है जिनमें ईरानी हमलों के प्रति सहानुभूति जताई गई थी।
आले -खलीफा शासन ने हाल के दिनों में 69 लोगों और उनके परिवारों की नागरिकता भी रद्द कर दी है और इसका कारण ईरान के समर्थन या उसकी कार्रवाई की सराहना बताया है। गिरफ्तार लोगों पर लगाए गए आरोपों में “IRGC के लिए जासूसी”, “देशद्रोह”, “ईरानी हमलों के वीडियो साझा करना”, “ईरान की कार्रवाइयों की प्रशंसा” और “हिंसा के लिए उकसाना” शामिल हैं। मानवाधिकार कार्यकर्ताओं का कहना है कि ये आरोप राजनीतिक आधार पर बनाए गए हैं ताकि विपक्ष की आवाज को दबाया जा सके और शिया समुदाय में डर का माहौल पैदा किया जा सके।
आपकी टिप्पणी