हिज़्बुल्लाह के प्रमुख शेख नईम क़ासिम ने प्रतिरोध के पास मौजूद हथियारों को छोड़ने से इनकार करते हुए कहा कि ईरान के लगातार प्रयासों और दबाव के बाद ही दुश्मन युद्धविराम के लिए मजबूर हुआ।
अहले बैत समाचार एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, हिज़्बुल्लाह लेबनान के प्रमुख शेख नईम क़ासिम ने कहा कि अगर ईरान की मजबूत कोशिशें और पाकिस्तान में बातचीत के दौरान उस पर जोर नहीं दिया जाता, तो लेबनान में युद्धविराम संभव नहीं था। उन्होंने कहा कि ज़ायोनी सरकार अब पूरी तरह से फंस चुकी है और प्रतिरोध अपनी ताकत, ईमान और इच्छाशक्ति के कारण अजय साबित हुआ है।
शेख नईम क़ासिम ने दुश्मन से सीधे बातचीत को सख्ती से खारिज करते हुए कहा कि लेबनान सरकार का रुख देश के हित में नहीं है, बल्कि नुकसानदायक है। सरकार को जनता की ओर लौटना चाहिए और राष्ट्रीय संप्रभुता जनता के हाथ में होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि प्रतिरोध के हथियार लेबनान की रक्षा और दुश्मन के हमलों का जवाब देने के लिए हैं, और किसी भी हालत में इन्हें नहीं छोड़ा जाएगा।
उन्होंने आगे कहा कि हिज़्बुल्लाह, अमल मूवमेंट और अन्य राष्ट्रीय ताकतें एकजुट हैं, और शहीदों के खून को व्यर्थ नहीं जाने दिया जाएगा। ज़ायोनी सरकार लेबनान की एक इंच जमीन भी अपने कब्जे में नहीं रख सकेगी और सभी नागरिक अपनी जमीनों पर लौटेंगे। शेख नईम क़ासिम ने कहा कि लेबनान के पुनर्निर्माण की शुरुआत दुश्मन की वापसी, कैदियों की रिहाई, विस्थापित लोगों की वापसी और कब्जे के अंत से होगी।
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