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डेली हदीस
रहमते इलाही
जिसे अगर तू चाहता तो रुसवा कर सकता था, और उस पर रहमो करम करता है जिसे अगर तू चाहता तो महरूम कर सकता था
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डेली हदीस
इमाम का वुजूद
हमारे ही जरिए जमीन की बरकतें जाहिर होती हैं, अगर हम मे से कोई जमीन पर न हो तो जमीन अपने उपेर मौजूद लोगों को निगल जाए।
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डेली हदीस
हज़रत ज़ैनब का मक़ाम और मर्तबा
.....बिल्कुल ऐसा ही है जैसे इसके भाईयों हसन और हुसैन पर गिरया करे ।
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अकीला ए बनी हाशिम ज़ैनब
ऐ हमारे आज़ाद किये हुए लोगों की औलाद! क्या यह इन्साफ़ है के तूने अपनी औरतों और कनीज़ों तक को तो पर्दे में बैठा रखा है लेकिन रसूल अल्लाह (स0) की बेटियों को नामहरमों के दरमियान क़ैदी बना रखा है,
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डेली हदीस
पारसाई और ख्वाहिशे नफ़्स
..........सामने आने के बाद परहेज़गारों की पारसाई और पाकीज़गी ज़ाहिर होती है।
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डेली हदीस
माहे रजब की फ़ज़ीलत
"ख़ुशख़बरी है उनके लिए जो ज़िक्र करते हैं! ख़ुशख़बरी है उनके लिए जो अल्लाह की इताअत करते हैं!"
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हज़रत इमाम अली नक़ी अ.स., अख़्लाक़ और किरदार
इमाम अली नक़ी अ.स. का अख़्लाक़ और किरदार किसी से छिपा नहीं है। उलमा और इतिहासकार इस बात को अच्छी तरह से जानते हैं यहां तक कि अहलेबैत अ.स. के दुश्मनों ने भी आपकी तारीफ़ की है। अबू अब्दिल्लाह जुनैदी कहता है कि ख़ुदा की क़सम हज़रत इमाम अली नक़ी अ.स. इस ज़मीन पर अल्लाह की सबसे बेहतरीन मख़लूक़ हैं और लोगों में सबसे अफ़ज़ल हैं।
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डेली हदीस
खुद से राजी रहने वाला
..........राज़ी हो जाए उस से नाराज होने वालों की संख्या ज़्यादा हो जाती है।
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अहले बैत (अ.स.)
इमाम मुहम्मद बाकिर (अ.स.) के दौर के राजनीतिक और सामाजिक हालात
बनी उमय्या के अलग-अलग गुटों के बीच मतभेद, अलग-अलग इलाकों में लगातार विद्रोह, और लोगों के नाराजगी में बढ़ोतरी ने राजनीतिक ताकत को बिखरा दिया था। इस हालत में सरकार का ध्यान ज्यादातर अपनी गिरती ताकत को संभालने पर केंद्रित हो गया और इमाम और अहले बैत (अ.स.) की .....
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डेली हदीस
हज़रत ईसा की नसीहत
.....चराग़ की तरह है जो खुद जल जाता है लेकिन दूसरों को रौशनी पहुंचाता है।
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डेली हदीस
इमाम क्यों ज़रूरी है?
ऐसा न हो तो खौफ और उम्मीद खत्म हो जाएगी और कोई भी गलत काम से नहीं रुकेगा, और तदबीरें बेअसर हो जाएंगी।
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डेली हदीस
ज़ुहूर के समय इमाम की उम्र
यहाँ तक कि जो भी उन्हें देखेगा, उन्हें चालीस वर्ष का या उससे कम उम्र का समझेगा।”
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डेली हदीस
अल्लाह का खलीफा और नबी का जानशीन
..... जो ऐसा करे वह ज़मीन पर अल्लाह का खलीफा और उसके रसूल का जनशीन है।
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डेली हदीस
अल्लाह के लिए इमाम हुसैन की ज़ियारत
जब तक कि वह अपने घर वापस न पहुँच जाए जिब्राईल, मिकाईल और इस्राफ़ील (अ.स.) उसके.....
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डेली हदीस
अल्लाह के खौफ का असर
जो इबरत लेगा, वह साहिबे बसीरत बन जाएगा और बसीरत हासिल कर लेगा, वह .....
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डेली हदीस
सच्ची मारेफ़त का नतीजा
.......... वह इस फ़ानी दुनिया से अपनी इच्छाओं और ज़िंदगी का रुख फेर लेता है
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