7 जनवरी 2026 - 16:04
इमाम का वुजूद

हमारे ही जरिए जमीन की बरकतें जाहिर होती हैं, अगर हम मे से कोई जमीन पर न हो तो जमीन अपने उपेर मौजूद लोगों को निगल जाए। 

:امام سجاد عليه ‏السلام

نَحنُ أئِمَّةُ المُسلِمينَ ...و بِنا يُنزِلُ الغَيثَ ، و بِنا يَنشُرُ الرَّحمَةَ ، و يُخرِجُ بَرَكاتِ الأَرضِ ، و لَولا ما فِي الأَرضِ مِنّا لَساخَت بِأَهلِها؛

 [أمالي الصدوق: ص 156 ، ح 15]

इमाम ज़ैनुल आबिदीन सज्जाद अ.स. 

हम मुसलमानों के इमाम हैं, हमारी ही वसीले से बारिशें होती हैं और हमारे ही वुजूद से रहमतें फैलती हैं, हमारे ही जरिए जमीन की बरकतें जाहिर होती हैं, अगर हम मे से कोई जमीन पर न हो तो जमीन अपने उपेर मौजूद लोगों को निगल जाए। 

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