امام سجاد علیه السلام :
تَستُرُ عَلى مَن لَو شِئتَ فَضَحتَهُ، وتَجودُ عَلى مَن لَو شِئتَ مَنَعتَهُ، وكِلاهُما أهلٌ مِنكَ لِلفَضيحَةِ وَالمَنعِ، غَيرَ أنَّكَ بَنَيتَ أفعالَكَ عَلَى التَّفَضُّلِ، وأجرَيتَ قُدرَتَكَ عَلَى التَّجاوُزِ،
الصحيفة السجّاديّة : الدعاء ۴۵
इमाम सज्जाद अ.स.
तू उस इंसान के गुनाहों पर पर्दा डालता है, जिसे अगर तू चाहता तो रुसवा कर सकता था, और उस पर रहमो करम करता है जिसे अगर तू चाहता तो महरूम कर सकता था, हालाँकि तेरी निगाह में ये दोनों ही रुसवाई और महरूमी के लायक हैं। मगर तूने अपने सब कामों को एहसान और उदारता पर क़रार दिया है, और अपनी ताकत को दरगुज़र के साथ जारी किया है।
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