मॉस्को : रूस ने वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा को लेकर गंभीर चेतावनी जारी करते हुए कहा है कि क्षेत्रीय तनावों के कारण मानव इतिहास का सबसे बड़ा ऊर्जा संकट फिर से उभर सकता है। रूसी राष्ट्रपति के विशेष प्रतिनिधि किरिल दिमित्रिएव ने कहा कि यह संभावित संकट पिछले सभी ऊर्जा संकटों से कहीं अधिक व्यापक और गंभीर प्रभाव डाल सकता है।
दिमित्रिएव के अनुसार, यह संकट केवल तेल और गैस क्षेत्र तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि औद्योगिक और कृषि उत्पादों की वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं को भी बुरी तरह प्रभावित कर सकता है। उन्होंने कहा कि यदि मौजूदा भू-राजनीतिक तनाव बढ़ते हैं, तो दुनिया भर में ऊर्जा कीमतों में भारी उछाल और आपूर्ति बाधित होने का खतरा पैदा हो सकता है।
रूसी अधिकारी ने दावा किया कि इस संकट का सबसे अधिक असर यूरोपीय संघ और ब्रिटेन पर पड़ सकता है, क्योंकि उनकी अर्थव्यवस्थाएं ऊर्जा आयात पर काफी निर्भर हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि ऊर्जा आपूर्ति में किसी भी बड़े व्यवधान का सीधा असर उद्योगों, परिवहन, कृषि और उपभोक्ता बाजारों पर पड़ेगा।
गौरतलब है कि हाल के महीनों में पश्चिम एशिया में बढ़े तनाव और फारस की खाड़ी क्षेत्र में सुरक्षा संबंधी चिंताओं ने वैश्विक ऊर्जा बाजारों को प्रभावित किया है। विशेष रूप से हुर्मुज़ जलडमरूमध्य को लेकर बढ़ती चिंताओं ने तेल आपूर्ति और अंतरराष्ट्रीय व्यापार मार्गों की सुरक्षा पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि क्षेत्रीय तनाव कम नहीं हुए, तो वैश्विक ऊर्जा बाजारों में अस्थिरता और बढ़ सकती है, जिसका असर दुनिया की अर्थव्यवस्थाओं पर लंबे समय तक देखने को मिल सकता है।
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