जॉर्डन के पूर्व विदेश मंत्री और पूर्व उपप्रधानमंत्री मर्वान अल-मुआशिर ने अमेरिका और इस्राईल द्वारा ईरान के खिलाफ चलाए गए सैन्य अभियान की आलोचना की है। उन्होंने कहा कि यह युद्ध पूरी तरह से गैरजरूरी था और इससे जुड़े किसी भी लक्ष्य को हासिल नहीं किया जा सका।
अल-मुआशिर ने दावा किया कि ईरान के खिलाफ इस सैन्य कार्रवाई का नतीजा उम्मीद के मुताबिक नहीं निकला। उनके अनुसार, युद्ध ने क्षेत्रीय स्थिरता को नुकसान पहुंचाया और इसका असर केवल मध्य पूर्व तक सीमित नहीं रहा, बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भी पड़ा।
जॉर्डन के इस पूर्व राजनयिक ने कहा कि सैन्य विकल्प अपनाने के बावजूद अमेरिका और इस्राईल अपने घोषित उद्देश्यों तक नहीं पहुंच पाए। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि किसी भी विवाद का समाधान बातचीत और कूटनीतिक प्रयासों के जरिए किया जाना चाहिए।
उनका बयान ऐसे समय में आया है जब मध्य पूर्व में तनाव लगातार बढ़ा हुआ है और ईरान, अमेरिका तथा इस्राईल के बीच टकराव को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता बनी हुई है।
मर्वान अल-मुआशिर ने कहा कि युद्ध का आर्थिक प्रभाव भी गंभीर रहा। ऊर्जा बाजार, व्यापार मार्गों और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला पर इसका दबाव बढ़ा है। उन्होंने चेतावनी दी कि लंबे समय तक चलने वाले संघर्ष से दुनिया की अर्थव्यवस्था को और नुकसान हो सकता है।
ईरान और पश्चिमी देशों के बीच लंबे समय से चले आ रहे तनाव के बीच इस तरह के बयान क्षेत्रीय राजनीति में नई बहस को जन्म दे रहे हैं। कई विशेषज्ञों का मानना है कि सैन्य संघर्ष की जगह कूटनीतिक समाधान ही लंबे समय तक स्थिरता ला सकता है
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