8 सितंबर 2024 - 05:55
ग़ज़्ज़ा के हालात उन तस्वीरों से बहुत बदतर हैं जो प्रकाशित होती हैं।

शहीद होने वालों में 16 हज़ार 589 बच्चे हैं जिनमें से 115 अपनी मां का दूध पीते थे और जंग के ज़माने में वे पैदा हुए और उसी ज़माने में शहीद हो गये।

प्राप्त ताज़ा रिपोर्ट के अनुसार ज़ायोनी सरकार अब तक तीन हज़ार 524 से अधिक बार अपराध ग़ज़ा पट्टी में अंजाम दे चुकी है और इन अपराधों व हमलों के नतीजे में चालिस हज़ार 435 फ़िलिस्तीनी शहीद और 10 हज़ार से अधिक लापता हैं।

शहीद होने वालों में 16 हज़ार 589 बच्चे हैं जिनमें से 115 अपनी मां का दूध पीते थे और जंग के ज़माने में वे पैदा हुए और उसी ज़माने में शहीद हो गये।

इसी परिप्रेक्ष्य में अरब मूल के अमेरिकी विशेषज्ञ व चिकित्सक नान अहमद उबैद ने, जो अभी जल्द ही ग़ज़ा पट्टी से लौटे हैं, एक वीडियो प्रकाशित करके कहा है कि संभव है कि जो वीडियो सोशल साइटों या अलजज़ीरा जैसे चैनलों या लाइव प्रसारण पर आपने देखा हो परंतु कम्प्यूटर या टेलिवीज़न पर देखी जाने वाली तस्वीरों और ग़ज़ा की वास्तविकताओं में बहुत अंतर है।

इस अमेरिकी चिकित्सक ने कहा कि आप तस्वीरों को स्क्रीन पर देखते हैं और हो सकता है कि जिन तस्वीरों को दिखाया जाता है वे सबसे बुरी व हृदयविदारक हों परंतु वास्तविकता यह है कि जो तस्वीरें टेलिवीज़न से प्रसारित हुई हैं या कुछ सोशल साइटों पर देखी गयी हैं उनमें वे बुरी प्रतीत होती हैं परंतु मुझे अपेक्षा नहीं थी कि वास्तविकता और हक़ीक़त उससे भी सैकड़ों गुना बदतर है जिसकी मुझे अपेक्षा नहीं थी, मुझे झटका लगा और मैं हिल कर रह गया। लोग मुझसे वहां की ख़तरनाक और विषम घटनाओं के बारे में पूछते हैं।

दूसरी ओर डॉक्टर बिदाउट संगठन ने एलान किया है कि जेनीन पर इस्राईल का चार दिनों का आक्रमण बहुत ही भीषण, ख़तरनाक और चिंताजनक है।

इस संगठन की घोषणा के अनुसार इस्राईली सैनिकों ने चिकित्सा केन्द्रों तक पहुंच को बंद कर दिया है और एम्बुलेसों को लक्ष्य बना रहे हैं और लोगों के उपचार और देखभाल को विलंबित कर रहे हैं।