ताजा खबर
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डेली हदीस
सांस्कृतिकरहमते इलाही
जिसे अगर तू चाहता तो रुसवा कर सकता था, और उस पर रहमो करम करता है जिसे अगर तू चाहता तो महरूम कर सकता था
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डेली हदीस
सांस्कृतिकइमाम का वुजूद
हमारे ही जरिए जमीन की बरकतें जाहिर होती हैं, अगर हम मे से कोई जमीन पर न हो तो जमीन अपने उपेर मौजूद लोगों को निगल जाए।
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डेली हदीस
सांस्कृतिकहज़रत ज़ैनब का मक़ाम और मर्तबा
.....बिल्कुल ऐसा ही है जैसे इसके भाईयों हसन और हुसैन पर गिरया करे ।
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सांस्कृतिकअकीला ए बनी हाशिम ज़ैनब
ऐ हमारे आज़ाद किये हुए लोगों की औलाद! क्या यह इन्साफ़ है के तूने अपनी औरतों और कनीज़ों तक को तो पर्दे में बैठा रखा है लेकिन रसूल अल्लाह (स0) की बेटियों को नामहरमों के दरमियान क़ैदी बना रखा है,
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डेली हदीस
सांस्कृतिकअली अ.स. की दोस्ती
.....वह है जो अली अ.स. को उनकी ज़िंदगी और मौत के बाद भी दोस्त रखे।
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डेली हदीस
सांस्कृतिकरिज़्क़ की तलाश और कोशिश
.......... हमारे अजदाद उसकी तलाश में दौड़ते थे और तलाश करते थे।
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डेली हदीस
सांस्कृतिकपारसाई और ख्वाहिशे नफ़्स
..........सामने आने के बाद परहेज़गारों की पारसाई और पाकीज़गी ज़ाहिर होती है।
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