यमन के सैन्य प्रवक्ता ने टीवी पर संबोधन के दौरान कहा कि यह फैसला “आंख के बदले आंख” की नीति के तहत लिया गया है और इसे तुरंत लागू कर दिया गया है।

20 जुलाई 2026 - 17:42

यमन : मध्य पूर्व में तनाव एक बार फिर बढ़ता नजर आ रहा है। ईरान समर्थित यमन जनांदोलन ने सोमवार को सऊदी अरब के खिलाफ तत्काल प्रभाव से समुद्री नाकेबंदी लागू करने की घोषणा की है। यमन के सैन्य प्रवक्ता ने टीवी पर संबोधन के दौरान कहा कि यह फैसला “आंख के बदले आंख” की नीति के तहत लिया गया है और इसे तुरंत लागू कर दिया गया है।

यमन जनांदोलन का कहना है कि यह कदम पिछले लगभग 12 वर्षों से यमन पर लगाए गए आर्थिक, समुद्री और हवाई प्रतिबंधों, संसाधनों के कथित दोहन और बंदरगाहों व एयरपोर्ट की नाकेबंदी के जवाब में उठाया गया है। संगठन ने आरोप लगाया कि सऊदी अरब की कार्रवाइयों के कारण यमन लंबे समय से संकट झेल रहा है।

हाल ही में यमन जनांदोलन ने सऊदी अरब की ओर मिसाइलें दागने की खबर भी दी थी। यमन ने आरोप लगाया कि सऊदी नेतृत्व वाले गठबंधन ने उसके नियंत्रण वाले एक हवाई अड्डे पर हमला किया, जिससे कई वर्षों से चली आ रही संघर्षविराम व्यवस्था समाप्त हो गई।

यदि समुद्री नाकेबंदी प्रभावी रहती है तो लाल सागर और बाबुल-मंदब जलडमरूमध्य से गुजरने वाले सऊदी जहाजों की आवाजाही प्रभावित हो सकती है। इससे तेल आपूर्ति, समुद्री व्यापार और वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों पर भी असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है। साथ ही सऊदी अरब के तेल प्रतिष्ठानों और दक्षिणी क्षेत्रों पर मिसाइल तथा ड्रोन हमलों का खतरा भी बढ़ सकता है।

इस घटनाक्रम ने पाकिस्तान की चिंताएं भी बढ़ा दी हैं। पाकिस्तान और सऊदी अरब के बीच रक्षा सहयोग समझौता मौजूद है, जिसके तहत विशेष परिस्थितियों में दोनों देशों के बीच सैन्य सहयोग की व्यवस्था है। यदि क्षेत्रीय तनाव और बढ़ता है तथा सऊदी अरब सहायता की मांग करता है, तो पाकिस्तान पर भी रणनीतिक दबाव बढ़ सकता है।

हालांकि, पाकिस्तान के लिए स्थिति आसान नहीं मानी जा रही है। एक ओर उसके सऊदी अरब के साथ करीबी रक्षा संबंध हैं, वहीं दूसरी ओर पाकिस्तान के भीतर ईरान के प्रति सहानुभूति रखने वाले वर्ग भी मौजूद हैं। ऐसे में मध्य पूर्व में बढ़ता तनाव पाकिस्तान की विदेश नीति के लिए नई चुनौती बन सकता है

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