11 जून 2020 - 14:17
तो क्या ट्रम्प ईरान की शरण में जाना चाहते हैं? अरब देशों में चिंता की लहर...  अलअरबी अलजदीद का रोचक विश्लेषण!

लंदन से प्रकाशित होने वाले अरबी समाचार पत्र “ अलअरबीयुलजदीद” ने ईरान व अमरीका के संबंधों में हालिया संकेतों का जायज़ा लिया है।

हालिया दिनों में अमरीका की ओर से ईरान के साथ वार्ता के संकेत उच्च स्तर पर वह भी बिना किसी शर्त के देखने में आ रहे हैं। अमरीका की ओर से ईरान को वार्ता पर तैयार करने की कोशिश के दौरान दोनों देशों ने बंदियों का आदान प्रदान किया है जिसका अमरीकी सरकार ने खुल कर स्वागत किया यहां तक कि ट्रम्प ने तेहरान का शुक्रिया तक अदा किया इस अवसर पर अमरीकी राष्ट्रपति सहित अमरीकी राजनेताओं ने सांकेतिक रूप से  ईरान को बिना शर्त वार्ता का निमंत्रण भी दे दिया है तो सवाल यह है कि क्या अमरीकी सरकार राष्ट्रपति चुनाव की वजह से वार्ता करना चाहती है या फिर ईरान को वार्ता की मांग करने पर तैयार करना चाहती है?

    गत मंगलवार को अमरीकी विदेशमंत्रालय में ईरानी डेस्क के प्रभारी ब्रायन हुक ने हेरिटेज फाउंडेशन द्वारा आयोजित एक बैठक में भी इस विषय की ओर संकेत किया और अपनी आदत के मुताबिक इस बात पर बल देना नहीं भूले कि अमरीका की वर्तमान सरकार, ओबामा की तुलना में ईरान के प्रति कड़ा रुख रखती है।

    उन्होंने कहा कि ईरान ने बंदियों के सिलसिले में जो समझौता किया उससे उसने यह दर्शाया है कि वह अमरीका के साथ वार्ता और समझौते पर मजबूर है। उनके अनुसार, प्रतिबंधों, कूटनैतिक अलगाव और सैन्य कार्यवाही के खतरे के त्रिकोण का परिणाम निकला है।

    लेकिन इन सब के बावजूद उन्होंने ईरान के साथ वार्ता की संभावना की बात भी की। उन्होंने वास्तव में ईरान को संबोधित करते हुए कहा कि अमरीका के साथ समझौता प्रतिबंधों के अंत और कूटनयिक संबंध की स्थापना का कारण बन सकता है। उन्होंने कहा कि ईरान के सामने दो रास्ते हैं, वार्ता या फिर आर्थिक बिखराव!  ब्रायन हुक का यह बयान अमरीकी अधिकारियों के नये रुख का पता देता है जिसके अंतर्गत वह अब खुल कर ईरान को वार्ता का निमंत्रण दे रहे हैं।


    ईरान के लिए यह खुला निमंत्रण अमरीका के उप विदेश मंत्री डेविड शेन्कर के पिछले हफ्ते के बयान में नज़र नहीं आया क्योंकि उन्होंने ईरान के साथ किसी भी तरह के समझौते की संभावना को कठिन बताया। इसी तरह अमरीकी विदेशमंत्री माइक पोम्पियो ने ईरान को क्षेत्र में अशांति का कारण बताया जो 4 जून को अमरीकी राष्ट्रपति के उस बयान के विपरीत है जिसमें उन्होंने कहा था कि अगर ईरान अमरीका के साथ राष्ट्रपति चुनाव से पहले कोई समझौता करता है तो एक बेहतर समझौता हो सकता है।

    ब्रायन हुक ने ट्रम्प के इस बयान पर अपना विचार प्रकट करने से परहेज़ किया। ईरान के सिलसिले में अमरीकी नेताओं और अधिकारियों के अलग अलग और परस्पर विरोधी बयानों से ट्रम्प के लिए कठिन परिस्थितियों का पता चलता है।

ऐसा लगता है कि अमरीकी सरकार वर्तमान समय में देश के भीतर बहुत दबाव का शिकार है इस लिए उसे एक ऐसा रास्ता चाहिए जहां से वह कोरोना के परिणाम में आर्थिक दबाव को कम कर सके और इसके साथ ही जार्ज फ्लोइड की पुलिस द्वारा हत्या के बाद ट्रम्प पर जो भयानक दबाव पड़ रहा है वह भी ईरान से वार्ता की मदद से थोड़ा कम किया जा सके।

 इस लिए यह बहुत संभव है कि वाइट हाउस को यह विश्वास हो गया हो कि अगर ईरान को किसी तरह से वार्ता पर तैयार किया जाए और वह अमरीका के साथ वार्ता की मेज़ पर बैठ जाए तो अमरीका में हालात बेहतर हो सकते हैं जिसका फायदा ट्रम्प को राष्ट्रपति चुनाव में मिल सकता है। हालांकि जो हालात में उनमें अमरीका व ईरान के संबंधों में बेहतरी की कोई किरण दिखायी नहीं दे रही है लेकिन यह ज़रूर कहना चाहिए कि ऐसा होना असंभव भी नहीं है। Q.A साभार , अलअरबी अलअजदीद, लंदन. पार्स टूडे का सहमत होना आवश्यक नहीं ।