अमेरिकी डेमोक्रेटिक पार्टी के सीनेटर क्रिस मर्फी ने कहा है कि सऊदी अरब की राजधानी रियाज़ में अमेरिकी दूतावास पर ईरान के ड्रोन हमले से भारी नुकसान हुआ है। उन्होंने कहा कि अगर यह हमला दिन के समय हुआ होता, तो बड़ी संख्या में अमेरिकी नागरिकों की जान जा सकती थी।
‘द गार्जियन’ की रिपोर्ट के मुताबिक, कनेक्टिकट राज्य के सीनेटर क्रिस मर्फी हाल ही में कतर और सऊदी अरब के दौरे से लौटे हैं। उन्होंने रियाज़ स्थित अमेरिकी दूतावास में हुए नुकसान को बेहद गंभीर बताया। उनके अनुसार, नुकसान की स्थिति सार्वजनिक रूप से बताई गई जानकारी से कहीं ज्यादा खराब थी।
मर्फी ने पेंटागन पर आरोप लगाया कि वह अमेरिकी संसद के सदस्यों को युद्ध के वास्तविक नुकसान को देखने से रोक रहा है। उन्होंने अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ पर भी निशाना साधते हुए कहा कि वह युद्ध की कीमत और उसके नतीजों को अमेरिकी जनता से छिपाना चाहते हैं।
रिपोर्ट के अनुसार, 3 मार्च को सुबह-सुबह दो ड्रोन रियाज़ स्थित अमेरिकी दूतावास परिसर से टकराए थे। इस हमले के बाद आग लग गई और इलाके में काला धुआं उठता दिखाई दिया। उस समय इमारत खाली थी, इसलिए किसी की मौत या घायल होने की खबर नहीं आई।
सऊदी अरब के रक्षा मंत्रालय ने शुरुआत में नुकसान को मामूली बताया था। हालांकि, मर्फी के मुताबिक, ड्रोन हमले से दूतावास की कई मंजिलों को काफी नुकसान पहुंचा है।
उन्होंने कहा कि इमारत का वह हिस्सा, जहां आम तौर पर बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहते हैं, बुरी तरह प्रभावित हुआ है। उसका कुछ हिस्सा रहने या काम करने के लायक नहीं रह गया है और संभव है कि उसे दोबारा इस्तेमाल न किया जा सके। उन्होंने यह भी कहा कि दूतावास को जल्द ही किसी दूसरी जगह स्थानांतरित किया जा सकता है।
मर्फी ने कतर में रास लफान गैस परिसर का भी दौरा किया। उनके अनुसार, युद्ध के शुरुआती दिनों में हुए ड्रोन हमलों के कारण वहां एलएनजी यानी तरलीकृत प्राकृतिक गैस का उत्पादन बंद हो गया।
उन्होंने दावा किया कि इस नुकसान के कारण कतर के करीब 17 प्रतिशत निर्यात पर असर पड़ा है और मरम्मत में कम से कम तीन साल लग सकते हैं।
मर्फी ने बताया कि बंदरगाह पर उन्हें एलएनजी ले जाने वाला केवल एक जहाज दिखाई दिया, जबकि सामान्य तौर पर वहां छह जहाज मौजूद रहते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि उस समय प्रतिदिन केवल एक जहाज बंदरगाह से रवाना हो रहा था।
सीनेटर मर्फी ने कहा कि उन्होंने कतर में अमेरिकी सैन्य अड्डे अल-उदीद का दौरा करने के लिए कई सप्ताह पहले लिखित अनुरोध दिया था। उन्होंने इस बारे में अमेरिकी सेंट्रल कमांड (सेंटकॉम) के प्रमुख ब्रैड कूपर से भी बात की थी।
अल-उदीद क्षेत्र में अमेरिका के सबसे बड़े सैन्य ठिकानों में से एक है। लेकिन मर्फी के अनुसार, कतर पहुंचने पर उन्हें बताया गया कि वह सैन्य अड्डे में प्रवेश नहीं कर सकते और न ही वहां के सैन्य अधिकारियों से संपर्क कर सकते हैं।
मर्फी, जो अमेरिकी सीनेट की विदेश संबंध समिति और बजट आवंटन समिति के सदस्य हैं, ने आरोप लगाया कि पेंटागन नहीं चाहता कि सांसद युद्ध से हुए वास्तविक नुकसान को अपनी आंखों से देखें।
उनके इस बयान ने युद्ध के नुकसान, सैन्य ठिकानों की सुरक्षा और अमेरिकी सरकार की पारदर्शिता को लेकर नए सवाल खड़े कर दिए हैं।
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