20 मार्च 2025 - 16:55
मुस्लिम जगत और स्वतंत्रता प्रेमी ज़ायोनी अपराधों के विरुद्ध डट जाएं 

यह कृत्य अमेरिका के इशारे पर या कम से कम उसकी सहमति और उसकी ओर से दी गयी हरी झंडी से हो रहा है। इसलिए अमेरिका भी इस जुर्म में शरीक है। यमन की घटनाएं भी इसी तरह हैं। यमन के लोग, यमन की जनता पर यह हमला, यह भी अपराध है जिसे अवश्य रोका जाना चाहिए।

ईरान की इस्लामी क्रांति के सुप्रीम लीडर हज़रत आयतुल्लाह खामेनेई ने ईरान के नए शम्सी साल की शुरुआत मे अपने संबोधन मे पिछले वर्ष की घटनाओं का उल्लेख  करते हुए नए साल का नारा दिया  "उत्पादन के लिए पूंजीनिवेश"

आयतुल्लाह खामेनेई ने पिछले साल हुए घटनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि पिछला साल बड़ी घटनाओं से भरा हुआ था। पिछले साल एक के बाद एक होने वाले घटनाक्रम 1980 के दशक के जैसे और हमारी जनता के लिए सख़्तियों और कठिनाइयों वाले थे। साल के शुरू में, ईरान के लोकप्रिय राष्ट्रपति मरहूम आक़ाए रईसी की शहादत हुई। उससे पहले दमिश्क़ में हमारे कुछ सलाहकार शहीद हुए। उसके बाद तेहरान और फिर लेबनान में अनेक घटनाक्रम हुए कि जिसके नतीजे में ईरानी क़ौम और इस्लामी जगत ने क़ीमती रत्न खो दिए।

ये दुखद और कटु घटनाएं थीं। इसके अलावा पूरे साल ख़ास तौर पर दूसरे छह महीनों में आर्थिक मुश्किलों से लोगों पर दबाव बढ़ा, आर्थिक कठिनाइयां, जनता के लिए मुश्किलें पैदा करती रहीं। ये कठिनाइयां पूरे साल मौजूद थीं लेकिन इसके मुक़ाबले में एक अज़ीम और अजीब घटना घटी और वह ईरानी क़ौम की संकल्प की ताक़त, ईरानी क़ौम के आध्यात्मिक मनोबल, ईरानी क़ौम की एकता और ईरानी क़ौम की बड़े स्तर पर तैयारी का ज़ाहिर होना था।

फिलिस्तीन और गज़्ज़ा का जिक्र करते हुए आयतुल्लाह खामेनेई ने कहा कि गज़्ज़ा पर क़ाबिज़ ज़ायोनी शासन का दोबारा हमला, बहुत बड़ा अपराध और त्रासदी को जन्म देने वाला है। इस्लामी जगत इसके मुक़ाबले में एकजुट होकर डट जाए। अनेक मुद्दों पर अपने मतभेदों को नज़रअंदाज़ करे। यह इस्लामी जगत का मसला है। इसके अलावा पूरी दुनिया में आज़ाद विचार के लोग ख़ुद अमेरिका, पश्चिमी और योरोपीय देशों में और दूसरे देशों में जनता पूरी गंभीरता से  ग़द्दारी से भरी और त्रास्दी को जन्म देने वाली इस करतूत का मुक़ाबला करें।

एक बार फिर बच्चे मारे जा रहे हैं, घर तबाह हो रहे हैं, लोग बेघर हो रहे हैं, इस त्रास्दी को जनता ज़रूर रोकें। अलबत्ता अमेरिका भी इस त्रास्दी और अपराध मे बराबर का भागीदार है । दुनियाभर के राजनैतिक टीकाकारों, सबका यह मानना है कि यह कृत्य अमेरिका के इशारे पर या कम से कम उसकी सहमति और उसकी ओर से दी गयी हरी झंडी से हो रहा है। इसलिए अमेरिका भी इस जुर्म में शरीक है। यमन की घटनाएं भी इसी तरह हैं। यमन के लोग, यमन की जनता पर यह हमला, यह भी अपराध है जिसे अवश्य रोका जाना चाहिए।

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