गुरुवार की रात इराक़ के आतंकवाद विरोधी बल और अमरीकी सैनिकों के एक संयुक्त दल ने दक्षिणी बग़दाद में स्वयं सेवी बल के एक ठिकाने पर हमला किया और इराक़ी हिज़्बुल्लाह के कई जवानों को गिरफ़्तार कर लिया। दावा किया गया था कि ये लोग बग़दाद में अमरीकी दूतावास को निशाना बनाना चाहते थे। संयुक्त बलों ने उक्त ठिकाने से कई सैन्य उपकरणों को सुबूत के तौर भी पेश किया जबकि स्वयं सेवी बल, इराक़ की सेना का भाग है और आतंकी गुटों से लड़ने के लिए उसके पास सैन्य उपकरण हैं।
टीकाकारों का कहना है कि यह हमला, इराक़ के प्रधानमंत्री के आदेश के बिना संभव नहीं है क्योंकि वे सशस्त्र सेना के कमांडर हैं इस लिए इस बात में कोई शक ही नहीं है कि यह हमला उनके आदेश से हुआ है। अब सवाल यह है कि उन्होंने अपनी इच्छा से यह आदेश दिया है या अमरीका के हुक्म पर और अमरीकी अधिकारियों के आदेशों का पालन करते हुए यह काम किया है? या फिर अमरीका की ओर से दी गई ग़लत सूचनाओं के आधार पर उन्होंने इस हमले का आदेश जारी किया है?
इस बात की संभावना न होने के बराबर है कि अलकाज़ेमी ने ग़लती से यह आदेश दे दिया होगा क्योंकि वे इससे पहले इराक़ी गुप्तचर विभाग के प्रमुख थे और सारी परिस्थितियों से अच्छी तरह अवगत हैं। अगर यह मान लिया जाए कि यह हमला अमरीकियों की ओर से दी गई ग़लत सूचनाओं की वजह से किया गया है तब भी यह बात गले से नहीं उतरती क्योंकि उन्हें इराक़ी इंटेलीजेंस की ओर से दी गई सूचनाओं के आधार पर काम करना चाहिए न कि अमरीकी सेना की ओर से उपलब्ध कराई गई सूचनाओं के आधार पर कि जो स्वयं सेवी बल को तोड़ने की हर संभव कोशिश कर रही है।
ले देकर यही विचार बाक़ी बचता है कि इराक़ के प्रधानमंत्री मुस्तफ़ा अलकाज़ेमी ने अमरीकी अधिकारियों के कहने पर किया है जिन्होंने उनके प्रधानमंत्री बनने का समर्थन किया था और संभावित रूप से उसी समय उनसे कुछ वादे भी ले लिए होंगे। इराक़ के स्वयं सेवी बल से अमरीका, इस्राईल और सऊदी अरब की दुश्मनी के मद्देनज़र यह विचार, अप्रत्याशित भी नहीं है। इस विचार को बल, रोएटर्ज़ की उस रिपोर्ट से भी मिलता है जिसमें कहा गया है कि अलकाज़ेमी का यह क़दम, उनकी ओर से अमरीका से किए गए वादों का एक भाग है। यहीं पर यह बात भी उल्लेखनीय है कि इराक़ी प्रधानमंत्री जल्द ही अमरीका की यात्रा भी करने वाले हैं। इन सब बातों को देखते हुए लगता है कि अलकाज़ेमी खुल कर सामने आ गए हैं और उन्होंने अपना व्यक्तित्व उजागर कर दिया है वरना वे वे देश की संसद के विधेयक को लागू करने और अमरीकी सैनिकों को देश से बाहर निकालने के बजाए स्वयं सेवी बल पर हमले का आदेश क्यों जारी करते?
इस संबंध एक और बात ध्यान योग्य है और वह यह कि अमरीका भी और अलकाज़ेमी भी इस तरह के फ़ैसले करके बड़ी भूल कर रहे हैं। उनकी सोच यह थी कि इस क़दम से शियों के बीच फूट पड़ जाएगी और इराक़ में अमरीकी सैनिकों की उपस्थिति बाक़ी रखने का मार्ग समतल हो जाएगा लेकिन तुरंत ही यह विचार ग़लत साबित हो गया और स्वयं सेवी बल के ठिकाने पर इराक़ी जनता की कड़ी नकारात्मक प्रतिक्रिया सामने आई जिसके बाद अलकाज़ेमी को माफ़ी मांगनी पड़ी और गिरफ़्तार किए गए जवानों को रिहा करना पड़ा। अब इराक़ी जनता इस बात को और अच्छी तरह समझ गई है कि जब तक इराक़ में अमरीकी सैनिक बाक़ी रहेंगे, तब तक स्वयं सेवी बल पर हमले होते रहेंगे, चाहे अमरीका की ओर से हों, इस्राईल की ओर से हों, दाइश की ओर से हों या फिर अमरीका के लिए काम करने वाले इराक़ियों की ओर से हों। इस षड्यंत्र को ख़त्म करने का एकमात्र रास्ता, इराक़ से आतंकी अमरीकी सैनिकों को निकाल बाहर करना, संसदीय चुनाव आयोजित कराना और एक स्वाधीन सरकार का गठन करना है।