लंदन: ब्रिटेन के अखबार द गार्जियन की एक रिपोर्ट में यूरोपीय देशों की नीतियों पर सवाल उठाए गए हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, यूरोपीय सरकारों ने गाजा में जारी हिंसा को रोकने के लिए प्रभावी कदम नहीं उठाए। उन्होंने न तो इस्राईल को हथियारों की बिक्री पूरी तरह रोकी और न ही उसके खिलाफ सख्त व्यापारिक प्रतिबंध लगाए।
रिपोर्ट में कहा गया है कि इस्राईली सरकार को जवाबदेह ठहराने में यूरोपीय देशों की नाकामी से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उनकी साख और प्रभाव को नुकसान पहुंचा है।
गार्जियन की रिपोर्ट के अनुसार, यूरोपीय संघ ने यूक्रेन युद्ध के कारण रूस पर कई प्रतिबंध लगाए हैं, लेकिन इस्राईल के साथ उसके संबंध अब भी काफी हद तक सामान्य बने हुए हैं।
रिपोर्ट में इस अंतर को यूरोपीय देशों की नीतियों में दोहरे मानदंड के रूप में पेश किया गया है। इसमें सवाल उठाया गया है कि जब यूरोपीय देश मानवाधिकारों और अंतरराष्ट्रीय कानूनों की रक्षा की बात करते हैं, तो इस्राईल के मामले में वैसी ही सख्ती क्यों नहीं दिखाई जाती।
रिपोर्ट में यूरोपीय देशों में फिलिस्तीन के समर्थन में प्रदर्शन करने वाले लोगों के खिलाफ पुलिस कार्रवाई पर भी चिंता जताई गई है।
इसमें कहा गया है कि फलस्तीन समर्थक लोग अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के अपने अधिकार का इस्तेमाल कर रहे हैं, लेकिन उन्हें पुलिस कार्रवाई का सामना करना पड़ रहा है। रिपोर्ट के मुताबिक, ऐसे मामलों ने यूरोपीय देशों में लोकतांत्रिक अधिकारों को लेकर बहस तेज कर दी है।
गार्जियन की रिपोर्ट में कहा गया है कि फिलिस्तीन का मुद्दा यूरोपीय देशों के लोकतांत्रिक मूल्यों और मानवाधिकारों के प्रति उनकी प्रतिबद्धता को परखने की कसौटी बन गया है।
रिपोर्ट के अनुसार, यूरोप की रूस और इस्राईल के प्रति अलग-अलग नीतियों ने उसके मानवाधिकार संबंधी दावों पर सवाल खड़े किए हैं। इसमें यह भी रेखांकित किया गया है कि फिलिस्तीन के मुद्दे पर यूरोपीय देशों का रवैया उनकी अंतरराष्ट्रीय विश्वसनीयता को प्रभावित कर सकता है।
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