18 मई 2020 - 11:21
20 लाख करोड़ की हक़ीक़त, खोदा पहाड़ निकला चूहा, आर्थिक पैकेज का 10 प्रतिशत से भी कम हिस्सा ग़रीबों और बेरोज़गारों के लिए

भारत की वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा घोषित 20 लाख करोड़ रुपये के वित्तीय पैकेज का ब्योरा पूरा कर लिया है।

सीतारमण ने अपने पिछले पांच प्रेस कॉन्फ्रेंस में कुल मिलाकर 11.02 लाख करोड़ रुपये की घोषणाएं की। इससे पहले वित्त मंत्री ने प्रधानमंत्री गरीब कल्याण पैकेज के तहत 1.92 लाख करोड़ रुपये और भारतीय रिजर्व बैंक ने 8.01 लाख करोड़ रुपये की घोषणा की थी।

इस तरह कोरोना संकट से उबारने के नाम पर अब तक केंद्र सरकार ने कुल मिलाकर 20.97 लाख करोड़ रुपये की घोषणा की है जो कि जीडीपी का लगभग 10 प्रतिशत है।

टीकाकारों का कहना है कि ऐसा लग रहा है कि सरकार ने जनता की मदद के लिए बहुत अधिक राशि की घोषणा की है, हालांकि वास्तविकता यह है कि इस राशि का बहुत कम हिस्सा ही लोगों को सीधा आर्थिक मदद या राशन या प्रत्यक्ष लाभ हस्तातंरण के रूप में दिया जाना है, बाकी का पैसा बैंक गैरेंटी अर्थात लोन या कर्ज़ के रूप में दिया जाएगा।

आर्थिक राहत पैकेज के पांचों भागों का आंकलन करने से पता चलता है कुल 20 लाख करोड़ रुपये का 10 प्रतिशत से भी कम अर्थात दो लाख करोड़ रुपये से भी कम की राशि लोगों के हाथ में पैसा या राशन देने में खर्च की जानी है।

कोरोना महामारी के चलते उत्पन्न हुए इस अप्रत्याशित संकट के समाधान के रूप में कई अर्थाशास्त्री और यहां तक की उद्योगपति भी यह बात कह रहे थे कि ऐसे समय में लोगों के हाथ में पैसे देने की ज़्यादा ज़रूरत है, ताकि वे जब उस पैसे को खर्च करेंगे तो खपत बढ़ेगी और अर्थव्यवस्था को फिर से खड़ा करने में मदद मिलेगी।

वामपंथियों, अर्थशास्त्रियों और अज़ीम प्रेमजी राजीव बजाज उद्योगपतियों का कहना है कि लोगों के हाथ में पैसा देना ज़्यादा अच्छा है। इन लोगों का कहना है कि जब तक 32 करोड़ मज़दूरों के हाथ में पैसा नहीं जाएगा तो वे चीजें नहीं ख़रीदेंगे, जब वे ख़रीददारी नहीं करेंगे तो अर्थव्यवस्था में खपत कैसे आएगी और जब खपत नहीं होगी तो उद्योगों के उत्पाद नहीं बिकेंगे।