18 अक्टूबर 2026 - 18:32
फ्रांस में विशाल विरोध प्रदर्शन, 1,800 लोग गिरफ्तार, पुलिस की कार्रवाई पर उठे सवाल

प्रधानमंत्री के मुताबिक, इन समूहों से जुड़े लोगों ने खासकर पेरिस और मार्सिले में कई दुकानों और महंगे शोरूम में लूटपाट की। उन्होंने कहा कि ये समूह संगठित तरीके से काम कर रहे थे और हिंसा में शामिल थे।

पेरिस: फ्रांस में हाल ही में हुए देशव्यापी विरोध प्रदर्शनों के दौरान हिंसा और आगजनी की घटनाओं के बीच करीब 1,800 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। जर्मन अखबार हैंडेल्सब्लाट के अनुसार, फ्रांस के गृह मंत्री लॉरेंट नुनेज ने यह जानकारी दी। पुलिस के मुताबिक, अकेले पेरिस में 855 लोगों को गिरफ्तार किया गया है।

गृह मंत्री के अनुसार, देशभर में करीब 500 पुलिसकर्मी और अग्निशमन कर्मचारी घायल हुए हैं। हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि यह शुरुआती आंकड़ा है। हिंसा, सरकारी और निजी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने तथा दुकानों में लूटपाट करने के आरोपियों के खिलाफ जांच की जा रही है।

प्रदर्शन के दौरान पेरिस, मार्सिले, लियोन, बोर्डो, रेनेस, स्ट्रासबर्ग, ग्रेनोबल और नीस समेत कई शहरों में भारी नुकसान हुआ। लिमोज शहर में ऐतिहासिक सिटी हॉल की इमारत को भी गंभीर क्षति पहुंची।

लिमोज के मेयर ने सिटी हॉल में आग लगने के बाद दुख जताते हुए कहा कि नगर निगम की इमारत गणराज्य और सार्वजनिक सेवाओं का प्रतीक है। उन्होंने सरकारी संस्थानों और राष्ट्रीय प्रतीकों के खिलाफ हिंसा पर नाराजगी जताई।

प्रदर्शनकारियों ने कई जगह सरकारी इमारतों और संस्थानों को निशाना बनाया। ब्रेस्ट और मार्सिले में पुलिस स्टेशनों, आंजे और काले में नगर निगम की इमारतों तथा बोर्डो में प्रीफेक्चर कार्यालय पर हमले किए गए। लियोन में पर्यटन कार्यालय की एक शाखा को भी निशाना बनाया गया।

शनिवार को हुई हिंसा से पहले देशभर में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन हुए थे। इनमें हाई स्कूल के छात्र, विश्वविद्यालय के विद्यार्थी, ट्रेड यूनियन के सदस्य, किसान और येलो वेस्ट आंदोलन से जुड़े लोग शामिल हुए।

आयोजकों के मुताबिक, प्रदर्शन में करीब 8 लाख लोग शामिल हुए, जबकि अधिकारियों की उम्मीद इससे काफी कम थी। इन प्रदर्शनों को पिछले तीन सप्ताह से जारी छात्र आंदोलन के लिए एक बड़ी राजनीतिक सफलता माना जा रहा है। वर्ष 2018 से सक्रिय येलो वेस्ट आंदोलन के समर्थकों ने भी इसमें हिस्सा लिया।

फ्रांस के प्रधानमंत्री सेबास्टियन लेकोर्नू ने इस आरोप को खारिज किया कि सरकार हालात पर नियंत्रण खो रही है। उन्होंने हिंसा के लिए कट्टरपंथी वामपंथी समूहों को जिम्मेदार ठहराया।

प्रधानमंत्री के मुताबिक, इन समूहों से जुड़े लोगों ने खासकर पेरिस और मार्सिले में कई दुकानों और महंगे शोरूम में लूटपाट की। उन्होंने कहा कि ये समूह संगठित तरीके से काम कर रहे थे और हिंसा में शामिल थे।

लेकोर्नू ने पुलिस की कार्रवाई का बचाव करते हुए बताया कि करीब 150 पुलिसकर्मी घायल हुए हैं। हालांकि, उन्होंने प्रदर्शनकारियों के घायल होने की संख्या के बारे में जानकारी नहीं दी।

प्रधानमंत्री ने वामपंथी नेता जीन-ल्यूक मेलेंशों की पार्टी ‘फ्रांस अनबोड’ (LFI) पर भी निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि इस पार्टी की कट्टरपंथी वामपंथी राजनीति में अहम भूमिका है।

प्रदर्शन के दौरान हुई हिंसा, गिरफ्तारियों और संपत्ति को हुए नुकसान के बीच फ्रांस में कानून-व्यवस्था तथा पुलिस की कार्रवाई को लेकर बहस तेज हो गई है।

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