वरिष्ठ धर्मगुरु आयतुल्लाहिल उज़मा सैयद अली सीस्तानी की ओर से जारी बयान में जिसे उनके प्रतिनिधि सैयद अहमद साफ़ी ने पवित्र नगर कर्बला में नमाज़े जुमा के दौरान पढ़कर सुनाया, सचेत किया गया है कि जनता की वैध मांगों की अनदेखी करने के परिणाम, पूरे राष्ट्र को भुगतने पड़ेंगे।
आयतुल्लाहि उज़मा सैयद अली सीस्तानी ने निजी और सरकारी संपत्तियों की रक्षा पर बल देते हुए प्रदर्शनकारियों से अपील की है कि वह एजेन्टों और उपद्रवियों से अपना रास्ता अलग कर लें और उन्हें निजी और सरकारी संपत्तियों को नुक़सान पहुंचाने की अनुमति न दें।
बयान में कहा गया है कि इराक़ी जनता के दुश्मन और उनके एजेन्ट मतभेद फैलाने और देश को गृहयुद्ध में झोंकने के प्रयास कर रहे हैं।
बयान में कहा गया है कि दो महीने से जारी प्रदर्शनों के दृष्टिगत और देश को ख़ून ख़राबे से बचाने के लिए इराक़ी संसद को चाहिए कि वह राष्ट्रीय हित के दायरे में रहते हुए अपने चुनावी विकल्प पर पुनर्विचार करे।
ताज़ा रिपोर्ट के अनुसार इराक़ी प्रधानमंत्री आदिल अब्दुल महदी ने अपना त्यागपत्र संसद को पेश करने की घोषणा की है।