यह बात सऊदी अरब के पूर्व इंटैलीजेन्स चीफ़ तुर्की फ़ैसल ने इस्राईल के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार जनरल याक़ूब अमीदूर के साथ मुलाक़ात में कही थी। यह मुलाक़ात मई 2016 में अमरीकी थिंक टैंक द वाशिंग्टन इंस्टीट्यूट फ़ार नियर ईस्ट पालीसी ने करवाई थी।
तुर्की फ़ैसल ने तो अरब दिमाग़ और यहूदी पैसे की बात कही थी मगर अरब दुनिया में इसका उलटा हो रहा है। वहां यहूदी दिमाग़ और अरब पैसा इस्तेमाल हो रहा है और नतीजा अरबों के आए दिन अपमान के अलावा कुछ नहीं है। इस्राईली अख़बार यदीऊत अहारोनोत ने तेल अबीब में जानकार सूत्रों के हवाले से लिखा कि अरब सरकारें इस्राईली इंटैलीजेन्स के साइबर प्रोगैमिंग विशेषज्ञों की मदद ले रही हैं। अख़बार के अनुसार बहुत से इस्राईली इंजीनियर जिन्होंने अपनी मिलिट्री सर्विस के दौरान इंटैलीजेन्स विभाग अमान से साइबर प्रोग्रैमिंग की ट्रेनिंग ली है इस समय बहुत मोटी रक़म हासिल करके अरब सरकारों के लिए काम कर रहे हैं।
इससे पहले इस्राईल के आर्थिक ख़बरें छापने वाले अख़बार द मार्कर ने भी डार्क मैटर नामक कंपनी के बारे में एक रिपोर्ट प्रकाशित की थी। इस कंपनी का संबंध इस्राईल की खुफ़िया एजेंसी है और यह फ़ार्स खाड़ी के एक अरब देश में काम करती है। इस्राईली इंटेलीजेन्स में ऊंचे पदों पर कार्यरत रह चुके अधिकारी रिटायर होने के बाद इस्राईल से बाहर जाकर कंपनियां बना लेते हैं और यह कंपनियां दूसरे देशों को इंटैलीजेन्स सेवाएं देती हैं। वह साइबर अटैक के लिए विशेषज्ञों की भर्ती करती हैं।
एक अरब देश ने इस्राईली सेना के पूर्व कमांडरों के साथ एक एग्रीमेंट किया जिसके आधार पर इन कमांडरों ने उस कंपनी के लिए काम शुरु कर दिया जिसका संबंध उस अरब देश की इंटैलीजेन्स एजेंसी से था। अरब देशों की कंपनियों के लिए काम करने वाले इस्राईली साबइर विशेषज्ञों की तनख़्वाहें 10 लाख डालर सालाना तक पहुंचती हैं। डार्क मैटर कंपनी में काम करने वाले विशेषज्ञ इस्राईली सेना के लिए काम करने के दौरान प्राप्त होने वाला स्पेशलाइज़ेशन अरब देशों के आलोचकों और मानवाधिकार कार्यकर्ताओं की जासूसी करने के लिए भी प्रयोग करते हैं।
सऊदी पत्रकार जमाल ख़ाशुक़जी की हत्या के समय भी यह ख़बरें आई थीं कि सऊदी अरब सहित कई देश हैं जो सरकार विरोधी पत्रकारों और लेखकों तथा कार्यकर्ताओं की जासूसी के लिए इस्राईल की मदद ले रहे हैं।
यह बात भी उल्लेखनीय है कि इस्राईली रक्षा मंत्रालय से जुड़ी हुई एक कंपनी फ़ार्स खाड़ी के कुछ अरब देशों के तेल के कुओं की सुरक्षा के लिए काम करती है। इस कंपनी ने दो साल पहले 7 अरब डालर का शुद्ध लाभ हासिल किया था।
एशिया ग्लोबल टेक्नालोजी नाम की स्विस कंपनी को एक इस्राईली अमरीकी व्यक्ति मैटी कूख़ाफ़ी चलाता है। इस कंपनी ने एक अरब देश में आंतरिक सुरक्षा नेटवर्क बनाने के लिए बहुत महंगा टेंडर प्राप्त किया था। इस्राईली वायु सेना के पूर्व कमांडर ईतान बिन एलीयाहू भी इस कंपनी में काम करते थे।
जानकारियों से यह भी पता चला है कि इस्राईली सुरक्षा कंपनी अरब देशों में कई महत्वपूर्ण संस्थाओं और अधिकारियों को बाडी गार्ड भी देती है। यह इस्राईली कंपनियां अरब देशों में यूरोपीय और अमरीकी कंपनियों के नाम से काम करती हैं ताकि उनकी असली पहिचान सामने न आने पाए।
स्रोतः इंटरनेट, रायुल यौम