आईआरजीसी के वरिष्ठ कमान्डर ब्रिगेडियर जनरल हुसैन सलामी ने फ़ार्स की खाड़ी में तैनात सैनिकों से मुलाक़ात में कहा कि फ़ार्स की खाड़ी, हुर्मुज़ स्ट्रेट तथा आसपास मौजूद द्वीप और तट न केवल ईरान के लिए बल्कि पूरी दुनिया के लिए महत्वपूर्ण समझे जाते हैं और यह दुनिया की अर्थव्यव्था का अटूट हिस्सा हैं।
उनका कहना था कि इन सबके साथ यह क्षेत्र ईरान के लिए एक रक्षा विषय भी है और हम इस क्षेत्र में अपनी हवाई और समुद्री सीमाओं तथा अपने हितों की रक्षा के लिए, अपनी रक्षा शक्ति में वृद्धि की है और हमारी तीनों सेनाएं हर प्रकार के ख़तरों का मुक़ाबला करने के लिए पूरी तरह तैयार हैं।
जनरल सलामी ने निश्चित रूप से यह तैयारी, रक्षा और आक्रमक दोनों दृष्टि से है ताकि दुश्मनों के लिए स्पष्ट संदेश रहे। उन्होंने कहा कि ईरानी राष्ट्र के विरुद्ध शैतानी चाल चलने वालों और हर प्रकार के षड्यंत्र रचने वाले दुश्मनों के थिंक टैंक और युद्ध के मोर्चे यह जान लें कि दुश्मनों के हिसाब किताब ग़लत होने की स्थिति में ईरान की रणनीति रक्षा से आक्रमक हो जाएगी और ईरान की समस्त क्षमताएं आक्रमक रूप धारण कर लेंगी।
दूसरी ओर आईआरजीसी के एक अन्य वरिष्ठ कमान्डर जनरल अली फ़दवी का कहना है कि अमरीका ने शुरु से अब तक कई माध्यमों से इस्लामी क्रांति से दुश्मनी की और उसे अपनी दुश्मनी में पराजय का सामना भी हुआ। उनका कहना था कि कुर्दिस्तान, गुंबद और आज़रबाइ क्षेत्रों में विवाद फैलाने जैसी अमरीका की कार्यवाहियां इन सबका पक्का प्रमाण है और इनमें अमरीका को बुरी तरह पराजय हुई है।
उनका कहना था कि उसके बाद दुश्मन और निकट हुए और उन्होंने क्रांति को नुक़सान पहुंचाने का प्रयास किया, पांच विद्रोह कराए किन्तु उनमें भी वे विफल रहे, उसके बाद थोपा गया युद्ध शुरु किया, सद्दाम तो मोहरा था, उसके पीछे अमरीका, सोवियत संघ और यूरोप सहित 54 देश थे, हमारे पास बहुत से देशों के बंदी हैं, युद्ध ख़त्म हो गया किन्तु उनकी दुश्मनी ख़त्म नहीं हुई और दुश्मनों की समझ में आ गया कि हमारे ख़िलाफ़ की जाने वाली कार्यवाहियां, हमारे ही हित में समाप्त हो रही हैं।