अहलेबैत न्यूज़ एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार 2011 से सीरिया में लड़ाई शुरू होने के बाद से अब तक जहाँ आतंकवादियों का साथ देने के लिये विभिन्न देशों के लोग जा रहे हैं वहाँ इस्लामी पवित्र स्थलों की सुरक्षा के लिये भी अहलेबैत के चाहने वाले सीरिया का रुख़ कर रहे हैं। इस दौरान विभिन्न देशों के कई जवान इस देश में रौज़ों की सुरक्षा करते हुए अपनी जानें क़ुरबान कर रहे हैं। यहाँ तक कि कुछ देशों में अहलेबैत अ. के चाहने वालों नें विभिन्न नामों से जवानों के लश्कर तैयार किये हैं और उन्हें ट्रेनिंग देकर सीरिया भेजा जा रहा है ताकि सीरिया में मौजूद रौज़ों की सुरक्षा करने में सीरिया की फ़ौज की मदद कर सकें।इसी संदर्भ में एक अफ़ग़ानी जवान हज़रत ज़ैनब के हरम की सुरक्षा करते हुए शहीद हो गया और आतंकवादियों ने उसका सर काट कर कटा सर उसकी माँ के पास भेज दिया। ज्ञात रहे ऐसी क्रूर घटनाएं अंजाम देने वाले वहाबी आतंकवादियों का समर्थन सऊदी अरब और क़तर कर रहे हैं।
29 जनवरी 2014 - 20:30
समाचार कोड: 501550
अहलेबैत न्यूज़ एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार 2011 से सीरिया में लड़ाई शुरू होने के बाद से अब तक जहाँ आतंकवादियों का साथ देने के लिये विभिन्न देशों के लोग जा रहे हैं वहाँ इस्लामी पवित्र स्थलों की सुरक्षा के लिये भी अहलेबैत के चाहने वाले सीरिया का रुख़ कर रहे हैं