अहलेबैत न्यूज़ एजेंसी (अबना) की रिपोर्ट के अनुसार अहलेसुन्नत की सेन्ट्रल यूनिवर्सिटी अल अज़हर नें सलफ़ी मुफ़्ती क़रज़ावी के 30 जून से सम्बन्धित फ़तवे पर अफ़सोस जताते हुए अपने एक बयान में कहा कि यह उस इन्सान का फ़तवा है जो दीन के नाम पर बेगुनाह लोगों के क़त्ल को जाएज़ समझता है। अलअज़हर नें 30 जून के बारे में शेख़ क़रज़ावी की बातों पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि क़रज़ावी के फ़तवों से नफ़रत और ज़ुल्म की बू आती है। मिस्र की इस यूनिवर्सिटी नें अपने बयान के अन्त में कहा कि शेख़ क़रज़ावी के फ़तवे में केवल उन लोगों (इख़वानुल मुस्लेमीन) की सोच दिखाई देती है जिसका वह साथ देता है।शेख़ क़रज़ावी नें अपने बयान में 30 जून को मिस्र के राष्ट्रपति मोहम्मद मुरसी की बर्ख़ास्तगी को फ़ौज की बग़ावत कहते हुए कहा था कि सरदार अब्दुल फ़त्ताह के नेतृत्व में कुछ ऐसे लोगों नें मुरसी को सरकार से बेदख़ल किया है जिनका सम्बंध मिस्री क़ौम से नहीं है।स्पष्ट रहे कि 30 जून को मिस्र के लाखों लोगों नें सरकार के विरुद्ध प्रदर्शन किया था और सेना ने मोहम्मद मुरसी को सत्ता से बेदख़ल कर दिया था।
11 जुलाई 2013 - 19:30
समाचार कोड: 439960
अहलेसुन्नत की सेन्ट्रल यूनिवर्सिटी अल अज़हर नें सलफ़ी मुफ़्ती क़रज़ावी के 30 जून से सम्बन्धित फ़तवे पर अफ़सोस जताते हुए अपने एक बयान में कहा कि यह उस इन्सान का फ़तवा है जो दीन के नाम पर बेगुनाह लोगों के क़त्ल को जाएज़ समझता है