भारत से अहलेबैत समाचार एजेंसी (अबना) संवाददाता की रिपोर्ट के अनुसार मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी ने आज आरोप लगाया कि ईरान से तेल और गैस लेना जोकि भारत के लिए लाभदायक है, ईरान को अलग थलग करने की अमरीकी रणनीति को सफल बनाने के लिए क़ुरबान किया जा रहा है मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी के वरिष्ठ नेता प्रकाश करात ने कहा कि भारत , अमरीकी दबाव के कारण ईरान से तेल और गैस नहीं ख़रीद रहा है जबकि अमरीका के कई साथी जैसे जापान और दक्षिण कोरिया ईरान से निरन्तर तेल आयात कर रहे हैं और उन्होने यूरोपीय यूनियन के प्रतिबंधो के बाद भी ईरान को भुगतान के नये रास्ते भी निकाल लिए हैं। श्री करात ने कहा कि नाटो के एक देश तुर्की ने तेल के क्षेत्र में ईरान के साथ कई नए अनुबंध किए हैं और चीन ने भी ईरान से अपने तेल आयात को बढ़ाया है।भारत अपने तेल आयात का 12 प्रतिशत आयात ईरान से करता है जोकि चार लाख बैरल प्रतिदिन है यह सप्लाई अगस्त में बन्द हो सकती है क्योंकि भारत ने पिछले छ: महीनों से तेल का भुगतान नहीं किया है और उस पर ईरान की तेल कम्पनियों के पांच अरब डालर बाकी हैं। श्री करात ने कहा कि यह सब कुछ इस लिए हो रहा है क्योकि भारत अमरीका से परमाणु समझौते की ज़न्जीरों में जकड़ा हुआ है उन्होने यह भी कहा कि मनमोहन सिंह सरकार इस बात को निश्चित करने के लिए सारे प्रयास कर रही है कि अमरीकी कांग्रेस में पास होने वाले हाईड एक्ट के अन्तर्गत भारत परमाणु तकनीकी को बढ़ावा देने के लिए ईरान को अलग थलग करने और उस पर प्रतिबंध लगाने में अमरीका के साथ पूरी तरह से सहयोग करता दिखे।.........166