इस्राईल में चुनाव से कुछ दिन पहले आंतरिक राजनीतिक और सामाजिक मतभेदों को लेकर चिंता बढ़ गई है। एक ब्रिटिश मीडिया रिपोर्ट में आशंका जताई गई है कि समाज में गहरी होती दरारें भविष्य में देश के विभाजन और गृहयुद्ध जैसी स्थिति पैदा कर सकती हैं। रिपोर्ट में चुनाव के बाद बड़े पैमाने पर इस्राईलियों के पलायन की आशंका भी जताई गई है।
रिपोर्ट के मुताबिक, इस्राईल में अलग-अलग राजनीतिक और सामाजिक समूहों के बीच बढ़ता टकराव देश के भविष्य को लेकर चिंता बढ़ा रहा है। वर्ष 2026 में हर्जलिया सम्मेलन के लिए किए गए एक सर्वे का हवाला देते हुए बताया गया कि 97 प्रतिशत इस्राईली नागरिक आंतरिक मतभेदों को लेकर चिंतित हैं।
इस्राईल के राष्ट्रपति इसहाक हर्जोग ने भी इन मतभेदों के कारण गृहयुद्ध का खतरा पैदा होने की चेतावनी दी है।
ब्रिटिश अखबार डेली टेलीग्राफ के एक लेख में दावा किया गया कि इस्राईल को आर्थिक संकट और राजनीतिक-सामाजिक तनावों से गंभीर चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है।
लेख में अमेरिकी खुफिया एजेंसी सीआईए की एक कथित रिपोर्ट का भी जिक्र किया गया है। इसके अनुसार, आर्थिक मुश्किलों और समाज में बढ़ते विभाजन के कारण इस्राईल की स्थिरता प्रभावित हो सकती है।
रिपोर्ट में इस्राईल के अति-रूढ़िवादी यहूदी समुदाय, जिसे हरेदी समुदाय कहा जाता है, और सेना के बीच मतभेदों का भी उल्लेख किया गया है।
लेख के अनुसार, अगस्त में गिवाती ब्रिगेड की रोटेम बटालियन के कुछ सैनिकों ने गाजा में एक सैन्य गश्त में शामिल होने से इनकार कर दिया था। बताया गया कि बख्तरबंद वाहन में एक महिला सैन्य चिकित्सक की मौजूदगी के कारण उन्होंने उसमें सवार होने से मना कर दिया।
रिपोर्ट में कहा गया कि इस घटना के बाद 16 सैनिकों को सैन्य हिरासत की सजा सुनाई गई। इससे अति-रूढ़िवादी समुदाय में नाराजगी बढ़ी।
इस्राईल में धार्मिक परंपराओं, सैन्य जिम्मेदारियों और राजनीतिक विचारधाराओं को लेकर मतभेद लंबे समय से चर्चा का विषय रहे हैं। ताजा रिपोर्ट में इन्हीं विवादों को देश की आंतरिक स्थिरता के लिए चुनौती बताया गया है।
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