ट्रम्प अस्पताल में चार दिन से भी कम रुके और उनका कहना है कि इस दौरान वह सत्ता संचालन के कामकाज भी करते रहे। वाइट हाउस ने कुछ वीडियो क्लिप जारी कीं जिनमें ट्रम्प के आगे फ़ाइलों का ढेर दिखाई दिया जिन पर वह हस्ताक्षर कर रहे थे। विशेषज्ञों ने वीडियो देखकर यह बताया कि ट्रम्प दरअस्ल सफ़ेद काग़ज़ों पर हस्ताक्षर का ड्रामा कर रहे थे।
हम समेत बहुत से लोगों का मानना है कि चुनाव से कुछ हफ़्ते पहले यह ड्रामा तैयार कर लिया गया था ताकि मतदाताओं की हमदर्दी मिल जाए और ट्रम्प उस चैंपियन के रूप में नज़र आएं जिसने कोरोना को शिकस्त दी। ट्रम्प को नए सिरे से झूठ फैलाने का मौक़ा मिल जाए और उनके 3000 झूठ की लंबी सूची कुछ और लंबी हो जाए।
लगभग छह महीना पहले मैं ख़ुद कोरोना वायरस से संक्रमित हो गया था यह उस समय हुआ जब मैं अपने काम से मैड्रिड की यात्रा पर गया था। मैंने दस दिन से ज़्यादा का समय बेड पर गुज़ारा और मुझे बहुत ज़्यादा कमज़ोरी आ गई थी। हालांकि लक्षण भी ज़्यादा सीवियर नहीं थे। बस मुझे तेज़ बुख़ार था और कभी कभी खांसी आ जाती थी। फेफड़ों में इन्फ़ेक्शन नहीं हुआ था और सांस लेने में भी कोई तकलीफ़ नहीं थी। मेरी उम्र ट्रम्प से कम है।
हो सकता है कि कोई कहे कि आप अमरीका जैसे देश के राष्ट्रपति तो हैं नहीं कि आपके चारों तरफ़ डाक्टरों की भीड़ रहे इसलिए आपकी हालत इतनी ख़राब हो गई। यह बात सही भी है लेकिन आप बोरिस जानसन को क्या कहेंगे जो ट्रम्प से लगभग 20 साल छोटे हैं। उन्हें दो हफ़्ते का समय आईसीयू में गुज़ारना पड़ा। वह तीन हफ़्ते बाद अपना काम संभाल सके और उनके चेहरे से कमज़ोरी साफ़ ज़ाहिर हो रही थी।
ट्रम्प ख़ुद को सुपरमैन के रूप में पेश करने की कोशिश करते हैं जो हर बीमारी से सुरक्षित है और हर वायरस को शिकस्त दे सकता है। इसीलिए अस्पताल से निकलते ही उन्होंने पहला काम जो किया वह यह था कि हालीवुड की फ़िल्मों के स्टाइल में अपना मास्क उतारा और अमरीकियों को दावत दी कि वह स्वाभाविक रूप से अपना काम जारी रखें डर को अपने ऊपर सवार न करें, आप इस महामारी से न डरें आप उसे शिकस्त दे सकते हैं।
ट्रम्प यह बातें कर रहे हैं और दूसरी ओर सच्चाई यह है कि यह बीमारी अमरीका में दो लाख से अधिक लोगों की जान ले चुकी है, अमरीकी अर्थ व्यवस्था का सर्वनाश का चुकी है। पूरी दुनिया को इसने अपने चंगुल में जकड़ लिया है और लगातार इससे संक्रमित होने और मरने वालों की संख्या बढ़ रही है? तो क्या ट्रम्प जैसा इंसान एक बड़े देश का राष्ट्रपति बनने के लायक़ है?
यह लेख लिखने से पहले मैंने हार्वर्ड से शिक्षा हासिल करने वाले अपने एक डाक्टर दोस्त को फ़ोन किया और उनसे ट्रम्प के बारे में उनकी राय पूछी तो हमारे दोस्त ने कहा कि ट्रम्प के संक्रमित होने के बारे में विरोधाभासी ख़बरें हैं। अगर किसी को निमोनिया हो जाए तो वह चार दिन के भीतर अस्पताल से बाहर नहीं आता। आम तौर पर डाक्टर पूरी तरह ठीक हो जाने तक मरीज़ को बाहर जाने से मना करते हैं। चिकित्सा के अपने चालीस साल के अनुभव के आधार पर हमारे दोस्त ने कहा कि पहली लहर में तो हर वायरस घातक होता है फिर धीरे धीरे उसका ज़ोर टूट जाता है। यही वजह है कि पहली लहर में ब्रिटेन, स्पेन, फ़्रांस, अमरीका और दूसरे देशों में बहुत सारे लोगों की जानें चली गईं और अब मरने वालों की संख्या में कमी आ रही है हालांकि संक्रमण बढ़ रहा है। इसका मतलब यह है कि ट्रम्प की बीमारी और स्वास्थ्य के बारे में जो ख़बरें दी जा रही हैं उन पर आंख बंद करके भरोसा नहीं किया जा सकता।
हमें तो ट्रम्प के डाक्टरों की टीम की तरफ़ से दी जाने वाली ख़बरों पर भरोसा नहीं है। जब अमरीका के पूर्व विदेश मंत्री कोलिन पावेल कुछ शीशियां लेकर टीवी पर नज़र आए थे और कह रहे थे कि उनमें वह केमिकल और बायोलोजिक पदार्थ हैं जो सद्दाम के महाविनाश के हथियारों के कारख़ानों में तैयार किए गए हैं और बाद में उनका झूठ सारी दुनिया के लिए साबित हो गया तो फिर हमें ट्रम्प की मेडिकल टीम पर संदेह करने से कौन रोक सकता है?
ट्रम्प नाकाम नेता ही नहीं नाकाम अभिनेता भी हैं। आने वाले महीनों में बहुत से तथ्य सामने आएंगे चाहे वह चुनाव जीतें या हारें। फ़िलहाल इंतेज़ार कीजिए।
अब्दुल बारी अतवान
अरब जगत के विख्यात लेखक व टीकाकार