26 साल के इस सीरियाई युवा ने फ़्रांस प्रेस को वाट्सएप पर बताया कि मैंने एक हफ़्ता पहले आज़रबाइजान जाने के लिए अपना नाम लिखवाया है। मुझे तीन महीने के लिए जाना है और हर महीने 2000 डालर मिलेंगे।
अबू अहमद पांच साल से उस उग्रवादी संगठन का हिस्सा है जो सीरिया में सेना से लड़ रहा है और जिसे तुर्की का समर्थन हासिल है।
आज़रबाइजान-आर्मीनिया लड़ाई में तुर्की की सरकार आज़रबाइजान का साथ दे रही है।
फ़्रांस प्रेस ने एक सीरियाई लड़ाके से आज़रबाइजान में संपर्क किया है जो युद्ध के लिए वहां मौजूद है और उसके साथ दूसरे भी बहुत सारे लड़ाके गए हैं। दो दिन पहले ख़बर आई कि मुहम्मद शअलान नाम का एक सीरियाई युवा नागोर्नी में मारा गया है।
अबू अहमद नाम का युवा जो आज़रबाइजान जाने के लिए अपनी बारी के इंतेज़ार में है इदलिब के इलाक़े में होने वाली लड़ाई में तुर्की की सेना के इशारे पर सीरियाई सेना पर हमले करता था लेकिन इस इलाक़े में संघर्ष विराम लागू हो जाने के बाद उसके पास काम नहीं रहा और उसे तुर्की से मिलने वाली तनख्वाह कम होते होते 25 डालर तक पहुंच गई। इसलिए अब अबू अहमद ने आज़रबाइजान जाने का फ़ैसला किया है।
अबू अहमद का कहना है कि उसे आज़रबाइजान जाने के ख़तरों की जानकारी है लेकिन उसके पास कोई रास्ता नहीं है।
सीरिया संकट में तुर्की का रोल बेहद भयानक रहा है और उसने आतंकियों की मदद से सीरियाई सरकार का तख़्ता पलटने की कोशिश की और अब तुर्की इन लड़ाकों को लीबिया और आज़रबाइजान को मोर्चों पर भेज रहा है। आज़रबाइजान जाने वाले सीरियाई लड़ाकों में से अब तक 64 के मारे जाने की पुष्टि हो चुकी है।