8 अक्टूबर 2026 - 19:26
इस्लाम और अरब दुनिया का के सबसे कट्टर दुश्मनों में से एक है सऊदी अरब

सऊदी शासन न तो पैगंबर मुहम्मद ﷺ की सुन्नत का प्रतिनिधित्व करता है और न ही सुन्नी इस्लाम का। उनके अनुसार, सऊदी शासन ने इजरायल जैसी नीति अपना रखी है और अत्याचार के रास्ते पर चल रहा है।

सनआ: यमन जनांदोलन अंसारुल्लाह के नेता अब्दुल मलिक अल-हौसी ने सऊदी अरब पर यमन में आम नागरिकों को निशाना बनाने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि सऊदी अरब ने तनाव फिर से बढ़ाकर वही पुरानी नीति दोबारा शुरू कर दी है।
अब्दुल मलिक अल-हौसी ने यह बयान सनआ में 8 अक्टूबर 2016 को एक शोक सभा पर सऊदी अरब के हमले की दसवीं बरसी के मौके पर दिया। उन्होंने कहा कि इस हमले में एक हजार से अधिक यमनी लोग मारे गए और घायल हुए थे।
अल-हौसी ने कहा कि आज के दौर में सबसे कट्टर दुश्मनों में इजरायल और उसके समर्थक, विशेष रूप से अमेरिका, शामिल हैं। उन्होंने सऊदी अरब को भी अरब और इस्लामी दुनिया के सबसे कट्टर दुश्मनों में से एक बताया।
उन्होंने कहा कि सऊदी अरब खुद को इस्लाम का झंडाबरदार बताता है और उसके झंडे पर कलमा-ए-तौहीद लिखा है, लेकिन उसके साथ तलवार भी बनी हुई है। उनके अनुसार यह तलवार केवल मुस्लिम उम्मत के खिलाफ इस्तेमाल की गई है, जबकि अमेरिका और इजरायल के खिलाफ सऊदी अरब ने अब तक कोई सैन्य कार्रवाई नहीं की है।
अंसारुल्लाह नेता ने सनआ में अल-रुवैशान परिवार की शोक सभा पर हुए हमले को याद करते हुए कहा कि 2016 में सऊदी सेना ने एक शोक सभा को मिसाइल से निशाना बनाया था। इस हमले में एक हजार से अधिक यमनी लोग मारे गए और घायल हुए।
उन्होंने कहा कि सऊदी अरब ने यमन में दूसरी शोक सभाओं और शादी समारोहों को भी निशाना बनाया। उन्होंने बताया कि उसी सप्ताह धमार प्रांत के सनबान इलाके में एक शादी समारोह पर सऊदी हमले की बरसी भी थी, जिसमें 43 लोग मारे गए और 70 से अधिक घायल हुए थे।
अल-हौसी ने यमन में सऊदी अरब के दूसरे हमलों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि अतान के रिहायशी इलाके में प्रतिबंधित बम का इस्तेमाल किया गया, यमनी स्कूली बच्चों की बस पर हमला किया गया और बाद में यह दावा किया गया कि बस में सैन्य विशेषज्ञ सवार थे।
उन्होंने कहा कि सनआ और यमन के दूसरे प्रांतों में भी लोगों, मस्जिदों और बाजारों को निशाना बनाया गया। उनके अनुसार, सऊदी हमलों की शुरुआत भी सनआ के रिहायशी इलाकों को निशाना बनाने से हुई थी।
अल-हौसी ने आरोप लगाया कि सऊदी अरब ने जब से दोबारा तनाव बढ़ाया है, वह उसी नीति पर चल रहा है और बच्चों, स्कूली छात्रों तथा महिलाओं को निशाना बना रहा है।
उन्होंने सऊदी शासन पर तीखा हमला करते हुए कहा कि यह बच्चों और महिलाओं की हत्या करने वाला शासन है।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि यमन में हमलों के लक्ष्यों को लेकर सऊदी अरब अमेरिका और ब्रिटेन पर निर्भर है। उनके अनुसार, सऊदी अरब यमन में इजरायल जैसी आक्रामक और अन्यायपूर्ण नीति अपना रहा है, जो इस्लाम की शिक्षाओं, मानवीय मूल्यों और अंतरराष्ट्रीय कानूनों के खिलाफ है।
अल-हौसी ने कहा कि सऊदी अरब ने यमनी नागरिकों के घरों और बाजारों पर भी हमले किए हैं, जबकि उसके मीडिया इन जगहों को अंसारुल्लाह लड़ाकों के ठिकाने बताकर इन हमलों को सही ठहराने की कोशिश करते हैं।
उन्होंने कहा कि सऊदी अरब ने अमेरिका के सहयोग से यमन के लोगों के खिलाफ गंभीर अपराध किए हैं और ऐसा कोई दिन नहीं गुजरता जब यमनी जनता के खिलाफ कोई अपराध न किया गया हो।
अल-हौसी ने कहा कि सऊदी अरब अपने धार्मिक नारों और दावों के बावजूद वैसा नहीं है, जैसा वह खुद को दुनिया के सामने पेश करता है। उन्होंने कहा कि जो लोग इन धार्मिक नारों से प्रभावित होते हैं, वे सऊदी शासन की वास्तविकता को नजरअंदाज कर देते हैं।
अंसारुल्लाह नेता ने आगे कहा कि सऊदी शासन न तो पैगंबर मुहम्मद ﷺ की सुन्नत का प्रतिनिधित्व करता है और न ही सुन्नी इस्लाम का। उनके अनुसार, सऊदी शासन ने इजरायल जैसी नीति अपना रखी है और अत्याचार के रास्ते पर चल रहा है।
अल-हौसी ने कहा कि इतिहास में कई अत्याचारी शासक अपने धन, शक्ति और संसाधनों के बावजूद आखिरकार गिर गए। उन्होंने कहा कि अत्याचारियों को कुछ समय के लिए अमेरिका जैसी शक्तियों का संरक्षण मिल सकता है, लेकिन इससे वे हमेशा के लिए नहीं बच सकते और अंततः उन्हें अपने कर्मों का परिणाम भुगतना पड़ता है।

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