मंगलवार शाम को अरबी भाषा के न्यूज़ चीवी चैनल नबा के साथ इंटरव्यू में मोहम्मद अब्दुस्सलाम का कहना था कि जब तक सऊदी अरब और यूएई, ज़ायोनी शासन के प्रतिनिधित्व में लड़ते रहेंगे और अरबों डॉलर ख़र्च पानी की तरह बहाते रहेंगे, तब तक इस्राईल क्षेत्र में किसी भी युद्ध में शामिल नहीं होगा।
अब्दुस्सलाम का कहना था कि अमरीका ने सऊदी अरब और यूएई के साथ मिलकर यमन के ख़िलाफ़ विनाशकारी युद्ध शुरू किया, क्योंकि वह नहीं चाहता था कि यमनी जनता आज़ादी के साथ अपनी पसंद की सरकार चुने।
उन्होंने कहा कि अगर 21 सितंबर की क्रांति (2014 में यमन जनता द्वारा यमन के पूर्व राष्ट्रपति मंसूर हादी की सरकार का पतन) नहीं होती, तो आज अमरीका ने यमन को भी, इस्राईल के साथ संबंधों को सामान्य बनाने के लिए लाइन में लगा दिया होता।
अंसारुल्लाह आंदोलन के प्रवक्ता का कहना था कि फ़ार्स खाड़ी के अरब देश काफ़ी समय से ख़ुफ़िया रूप से इस्राईल के साथ संबंधों को सामान्य बना रहे थे, ट्रम्प प्रशासन ने अब अपने हित में उसे सार्वजनिक किया है। इतिहास, ग़द्दारों को उनकी बुरी करतूतों के लिए कभी नहीं भूलेगा। जिन्होंने इस्राईल के साथ दोस्ती का हाथ बढ़ाया है, उनका अंजाम बहुत बुरा होने वला है।