कुशनर एक ज़ायोनी हैं और उनका प्रयास है कि नवम्बर में अमरीकी राष्ट्रपति चुनाव के आयोजन से पहले ही, किसी भी तरह इस्राईल के लिए अरब देशों का समर्थन हासिल करके फ़िलिस्तीन की समस्या को हमेशा के लिए दफ़्न कर दिया जाए।
ज़ायोनी और अमरीकी वर्षों से अरब शासकों को यह यक़ीन दिलाने का प्रयास करते रहे हैं कि उनके आर्थिक, राजनीतिक और सामरिक हित, इस्राईल के साथ संबंधों को सामान्य बनाने से जुड़े हैं। जबकि सच्चाई यह है कि हमेशा से ही, इस्राईल की यह चाहत रही है कि किसी तरह उसके अरब देशों के साथ, कूटनीतिक संबंध स्थापित हो जाएं। लेकिन ज़ायोनियों का हुनर यह है कि उन्होंने अपनी इस चाहत को अरबों की इच्छा और कमज़ोरी बनाकर पेश किया। यही वजह है कि आज फ़ार्स खाड़ी के अरब शासकों को लगता है कि उनका भविष्य, इस्राईल के भविष्य से जुड़ा हुआ है और अमरीका और इस्राईल ही उनके मुक्तिदाता हैं।
इसके लिए ज़ायोनियों ने कई तरह की साज़िशें चली हैं। उनमें से एक अरब देशों के लिए ईरान को मुख्य ख़तरे के रूप में पेश करना है। जबकि सच्चाई यह है कि ईरान, ज़ायोनी शासन के लिए ख़तरा हो सकता है, न कि अपने पड़ोसी अरब देशों के लिए।
ज़ायोनी शासन, अमरीका की मदद से अरब शासकों को भ्रमित करने में सफल रहा है। एक ओर ईरान का डर दिखाकर दूसरी ओर तेल की समाप्ति के बाद की अर्थव्यवस्था के लिए बुनियादी ढांचे के निर्माण का लालच देकर, अरब देशों को इस्राईल के नेतृत्व में संगठित किया जा रहा है और इस प्रकार, ईरान के चारो ओर आग का एक गोला बनाने की कोशिश हो रही है, ताकि यह अरब देश ज़ायोनी शासन के लिए ढाल का काम करें।
ईरान विरोधी अरब-इस्राईल गठजोड़ में अमरीका और ज़ायोनी शासन, सबसे महत्वपूर्ण बिंदू को नज़र अंदाज़ कर रहे हैं और वह यह है कि इन अरब शासकों के समर्थन का मतलब, इन राष्ट्रों का समर्थन नहीं है। दुनिया में यह कौन नहीं जानता है कि अरब तानाशाहों को उनकी जनता का समर्थन हासिल नहीं है, जिसका सबसे बड़ा सुबूत यह है कि जब भी जिस अरब देश की जनता को मौक़ा मिलता है वह तानाशाही का तख़्तापलट कर देती है। अपनी जनता से बेहद ख़ौफ़ज़दा रहना इस बात का दूसरा सुबूत है। इसलिए इस बात की पूरी उम्मीद है कि भविष्य में जनता अपने अत्याचारी तथा भ्रष्ट शासकों को उखाड़ फेंकेगी और अपने देशों में अमरीकी और इस्राईली हस्तक्षेप का मार्ग बंद कर देगी। उस समय ईरान को घेरने और इस्राईल के लिए सुरश्रा प्रदान करने के अमरीका और ज़ायोनी शासन के समस्त समीकरण, धरे के धरे रह जायेंगे।