यमनी सेना और स्वयं सेवी बलों ने अलक़ायदा और दाइश के आतंकियों को उनके अलबैज़ा के मज़बूत ठिकाने से खदेड़ दिया और इसी पराजय ने उनके मनोबलो को बहुत गिरा दिया और वे मआरिब तक पीछे हट गये। अलबत्ता हमलावर सऊदी गठबंधन ने इन आतंकियों को बचाने के लिए कई हवाई हमले किए जिनका यमनी सेना और स्वयं सेवी बलों के हौसलों पर कोई असर नहीं पड़ा।
सऊदी अरब और उसके घटकों ने अपने एजेन्टों और तकफ़ीरियों का मनोबल बढ़ाने और युद्ध के लिए उनको तैयार करने की बहुत कोशिशें कीं। सऊदी अरब और उसके एजेन्टों के मनोबल गिरने की एक वजह यह है कि मुराद और ओबैदा क़बीले ने अंसारुल्लाह से हाथ मिला लिया और युद्ध में सऊदी गठबंधन का साथ देने से इनकार कर दिया।
अलबैज़ा प्रांत में सऊदी और इमाराती एजेन्टों की पराजय का एक अन्य कारण यह है कि यमन के त्यागपत्र दे चुके राष्ट्रपति मंसूर हादी और अलइस्लाह पार्टी के प्रमुख अली मुहसिन अलअहमर में अंदर अंदर काफ़ी मतभेद पैदा हो गये हैं।
इसीलिए हमलावर सऊदी गठबंधन ने यमन के दक्षिणी प्रांतों से पिछले घंटों के दौरान काफ़ी मात्रा में एजेन्टों को जमा किया है ताकि उन तकफ़ीरी आतंकियों का समर्थन करें जो मआरिब प्रांत में यमनी सेना और स्वयं सेवी बलों के हाथों बुरी तरह से पराजित हुए हैं।
मआरिब प्रांत में सऊदी गठबंधन की स्थिति पर ख़राब है। यमन में ब्रिटेन के राजदूत माइकल आरून ने आले सबीईयान क़बीले के बच्चों और महिलाओं के विरुद्ध स्थानीय सऊदी एजेन्टों के अपराधों की अनदेखी करते हुए कहा कि मआरिब पर हमला, अमानवीय है।
ब्रिटिश राजदूत ने ऐसी स्थिति में इस प्रांत में युद्ध विराम का सुझाव दिया है लेकिन उन्होंने मानवीय मुद्दों से जुड़े विषयों की ओर कोई संकेत नहीं किया। यमन की राष्ट्रीय मुक्ति सरकार के उप विदेशमंत्री हुसैन अलइज़्ज़ी ने ब्रिटिश राजदूत के बयान पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए एक अपमान पर पर्दा डालने की कोशिश क़रार दिया क्योंकि अलक़ायदा और दाइश, मंसूर हादी की झूठी सरकार का ढांचा समझे जाते हैं जिसे ब्रिटेन औपचारिकता देता है।
मआरिब में अपने एजेन्टों को बचाने के लिए सऊदी अरब, संयुक्त अरब इमारात और अमरीका इतना हाथ पैर इसलिए मार रहे हैं ताकि युद्ध की प्रक्रिया को संभवता बल सकें। यमनी जियाले आज युद्ध के मैदान में एक और बड़ी जीत के निकट हैं जिसकी घोषणा कभी भी हो सकती है।