19 अगस्त 2020 - 14:28
रफ़ीक़ हरीरी की हत्या में इस्राईल का हाथ था, बैरूत बंदरगाह के धमाके में भी इस्राईल लिप्त हैः अतवान

मशहूर अरबी समाचारपत्र रायुल यौम के प्रधान संपादक ने अपने संपादकीय में लिखा है कि जिस तरह रफ़ीक़ हरीरी की हत्या में ज़ायोनी शासन का हाथ था, उसी तरह बैरूत के जनसंहार में भी वह लिप्त है।

अब्दुल बारी अतवान ने बुधवार को लिखे गए अपने लेख में लेबनान के पूर्व प्रधानमंत्री रफ़ीक़ हरीरी की हत्या के मुक़द्दमे की सुनवाई करने वाले अंतर्राष्ट्रीय न्यायालय के जजों की, जिन्होंने इस हत्याकांड में लिप्त होने के आरोपों से सीरिया व हिज़्बुल्लाह को बरी कर दिया है, इस हत्याकांड में ज़ायोनी शासन व उसके एजेंटो। की भूमिका की अनदेखी करने के कारण आलोचना की है। उन्होंने लिखा है कि जिस तरह रफ़ीक़ हरीरी की हत्या में ज़ायोनी शासन का हाथ था, उसी तरह वह चार अगस्त को बैरूत में होने वाले जनसंहार में भी लिप्त है।

 

रायुल यौम के संपादक ने लिखा है कि अंतर्राष्ट्रीय न्यायालय ने रफ़ीक़ हरीरी की हत्या के मामले में जो फ़ैसला सुनाया है वह ऐतिहासिक है क्योंकि इसने लेबनान को राजनैतिक व सांप्रदायिक षड्यंत्रों से दूर कर दिया है, इसके अलावा एक सवाल जो बड़ी शिद्दत से सामने आ रहा है, वह यह है कि इस फ़ैसले में हरीरी की हत्या के बाद के पहले चरण की अनदेखी की गई है जिसमें सीरिया व हिज़्बुल्लाह को इस हत्या के लिए दोषी बताने की साज़िश की गई थी। इस आधार पर वे झूठे गवाह और उनकी झूठी गवाहियां कहां हैं और वह वीडियो बनाने वाला कहां हैं जिसने अपने वीडियो में इसकी ज़िम्मेदारी सीरिया व हिज़्बुल्लाह पर डाली थी? यह सवाल भी पूछा जाना चाहिए कि इस तरह के लोगों की झूठी बातों को ठोस सच के रूप में क्यों स्वीकार कर लिया गया था?

 

अतवान लिखते हैं कि इन सवालों का जवाब देने से पहले इस फ़ैसले पर भी ग़ौर करना ज़रूरी है। अंतर्राष्ट्रीय न्यायालय की जांच, उसका फ़ैसला और इसी तरह अदालत को गुमराह करने वाली कार्यवाहियां इस बात का कारण बनती हैं कि बैरूत में हुए जनसंहार के बारे में गहन विचार किया जाए और इस संभावना को रद्द न किया जाए कि इस जनसंहार में विदेशी साज़िश और इस्राईल का हाथ हो सकता है। इसी तरह बैरूत बंदरगाह की घटना के तुरंत बाद बिना सोचे-समझे हिज़्बुल्लाह पर लगाए जाने वाले आरोपों के बारे में भी जांच की जानी चाहिए।

 

अब्दुल बारी अतवान अंत में लिखते हैं कि हम हमेशा से इस्राईल, उसके एजेंटों और लेबनान में उसके षड्यंत्रों को अंजाम देने वाले फ़िफ़्थ काॅलम को प्रत्यक्ष व परोक्ष रूप से इस अपराध के लिए ज़िम्मेदार समझते रहे हैं और ईश्वर की इच्छा से निकट भविष्य में इस संबंध में सच्चाई उजागर हो जाएगी।