मोसाद के पूर्व प्रमुख ने न्यूयॉर्क टाइम्स से बात करते हुए कहा है कि ईरान, पूरे आत्मविश्वास के साथ, अपने परमाणु कार्यक्रम को आगे बढ़ा रहा है और अब उसके रास्ते में कोई बड़ी रुकावट खड़ी करना आसान नहीं है।
80 वर्षीय शावित ने 2018 में प्रकाशित हुई अपनी किताब -मोसाद का प्रमुख- में स्वीकार किया था कि ईरान को रोक पाना संभव नहीं है। जब उनसे इस बारे में सवाल किया गया तो उन्हों
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि ईरान परमाणु हथियार बनाने का प्रयास कर रहा है, हालांकि ईरान हमेशा ही इस तरह के आरोपों को ख़ारिज करता रहा है और इसीलिए उसने 2015 में विश्व की 6 बड़ी ताक़तों के साथ परमाणु समझौता भी किया था।
इसके अलावा, ईरान के सर्वोच्च नेता भी परमाणु हथियार बनाने और उनके इस्तेमाल के ख़िलाफ़ फ़तवा भी दे चुके हैं।
ज़ायोनी शासन ईरान पर परमाणु हथियार बनाने का आरोप ऐसी स्थिति में लगाता रहा है, जब पूरे पश्चिम एशिया में सिर्फ़ उसके पास परमाणु हथियार हैं और उसने एनपीटी पर हस्ताक्षर नहीं किए हैं।
ईरान का कहना है कि ऊर्जा समेत शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए परमाणु तकनीक हासिल करना उसका अधिकार है और यह अधिकार उससे दुनिया की कोई ताक़त नहीं छीन सकती।
अमरीका और इस्राईल, ईरान के परमाणु कार्यक्रम में रुकावट डालने के मक़सद से कई ईरानी वैज्ञानिकों की हत्या कर चुके हैं और ईरान के परमाणु प्रतिष्ठानों पर साइबर हमले भी कर चुके हैं।
हाल ही में 2 जुलाई को नतंज़ स्थित, परमाणु प्रतिष्ठान में घटी दुर्घटना में भी ज़ायोनी अधिकारी अपना हाथ होने के संकेत दे चुके हैं।
हालांकि तेहरान ने एलान किया है कि वह इस घटना के कारणों की जांच कर रहा है और सही समय पर इसके कारणों को सार्वजनिक किया जाएगा। अगर इसके पीछे किसी का हाथ पाया गया तो उसे उचित जवाब भी दिया जाएगा।
ने कहाः ईरानी कभी भी अपने संकल्प से पीछे नहीं हटेंगे।