सूरए यूनुस की आयत क्रमांक 45 का अनुवादः
और जिस दिन ईश्वर उन्हें एकत्रित करेगा तो ऐसा जान पड़ेगा मानो वे (संसार में) दिन की एक घड़ी भर ठहरे थे। वे आपस में एक दूसरे को पहचान रहे होंगे। निश्चित रूप से जिन लोगों ने (प्रलय में) ईश्वर से मिलने को झुठलाया वे घाटे में रहे और वे मार्ग पाने वालों में न थे।
संक्षिप्त टिप्पणी:
प्रलय के दिन यद्यपि लोगों को मरे हुए एक लंबी अवधि बीत चुकी होगी किन्तु उन्हें ऐसा प्रतीत होगा कि वे सो रहे थे और अभी अभी जागे हैं, अतः वे एक दूसरे को भलिभांति पहचान रहे होंगे और भूले नहीं होंगे।
इस आयत से मिलने वाले पाठ:
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सांसारिक आयु इतनी कम है कि प्रलय में मनुष्य इस अल्पायु से भी लाभ न उठाने के कारण घाटे का आभास करेगा।
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वास्तविक घाटा यह है कि मनुष्य संसार के अस्थायी आनंदों को अनंत सफलताओं एवं कल्याण पर श्रेष्ठता दे।