लेबनान के राष्ट्रपति जोसेफ औन ने कहा है कि हमने लेबनान के बचे हुए हिस्से को बचाने का फैसला किया है। हमने बातचीत का रास्ता इसलिए चुना है, क्योंकि युद्ध से हमें कोई नतीजा हासिल नहीं होगा।
अल-कुद्स अल-अरबी के अनुसार लेबनान के राष्ट्रपति जोसेफ औन ने मंगलवार को यह बयान दिया।
राष्ट्रपति औन ने कहा कि इस्राईल के साथ हुआ समझौता भले ही आदर्श नहीं है, लेकिन इससे ज़ायोनी हमलों को और अधिक फैलने से रोकने में मदद मिली है।
उन्होंने कहा कि लेबनान का मुख्य उद्देश्य ज़ायोनी सेना की वापसी, विस्थापित लोगों की अपने घरों में वापसी, कैदियों की रिहाई और देश का पुनर्निर्माण करना है।
दक्षिणी लेबनान पर इस्राईल के लगातार हमलों का ज़िक्र करते हुए औन ने कहा कि लेबनानी अधिकारी इन हमलों को कम करने और अंततः पूरी तरह बंद कराने की कोशिश कर रहे हैं।
उन्होंने आगे कहा, “हमारे सामने यह सवाल था कि क्या युद्ध की स्थिति और इस्राईल की समुद्री गतिविधियों को जारी रहने दिया जाए, या फिर ऐसे कदम उठाए जाएँ जिनसे देश को और बड़ी तबाही से बचाया जा सके।”
राष्ट्रपति औन के अनुसार, युद्ध आम तौर पर दो तरीकों से समाप्त होते हैं—या तो किसी एक पक्ष को निर्णायक जीत मिलती है या फिर बातचीत के ज़रिए समाधान निकलता है। हमने दूसरा रास्ता चुना है, क्योंकि इससे और अधिक नुकसान को रोका जा सकता है।
उन्होंने कहा कि दक्षिणी लेबनान के लोग लगातार युद्ध से थक चुके हैं और अब वे शांति तथा सुरक्षा के साथ जीवन बिताना चाहते हैं।
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