सूरए अहज़ाब की आयत क्रमांक 43 व 44 का अनुवादः
वही है जो तुम पर दया भेजता है और उसके फ़रिश्ते भी (तुम्हारे लिए दया की दुआ करते हैं) ताकि वह तुम्हें अँधरों से प्रकाश की ओर निकाल लाए। और वह ईमान वालों के लिए (हमेशा ही) बहुत दयालु है। जिस दिन वे उससे मिलेंगे उस दिन उनका अभिवादन सलाम होगा और ईश्वर ने उनके लिए भला प्रतिफल तैयार कर रखा है।
संक्षिप्त टिप्पणी:
ईश्वरीय दया व कृपा भी इंसान को निरंतर प्राप्त होती रहे और वह ईश्वर के विशेष मार्गदर्शन का पात्र बने।
इन आयतों से मिलने वाले पाठ:
- जीवन के अंधकारों से मुक्ति के लिए केवल मनुष्य की बुद्धि और उसका ज्ञान काफ़ी नहीं है बल्कि उसे ईश्वरीय सहायता की भी ज़रूरत है।
- ईश्वर की याद, उसकी सहायता की प्राप्ति का मार्ग प्रशस्त करती है।
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वास्तविक ईमान, ईश्वरीय दया की प्राप्ति की कुंजी है और वह दया इंसान को मार्गदर्शन के प्रकाश का तोहफ़ा प्रदान करती है।
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स्वर्ग के लोग “सलाम” शब्द से एक दूसरे का अभिवादन करते है जिसका अर्थ होता है शांति।
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सिफ़ारिश की गई है कि दुनिया में भी ईमान वाले लोग एक दूसरे से मुलाक़ात के समय इस सुंदर व अर्थपूर्ण शब्द का इस्तेमाल करें।