16 मार्च 2020 - 16:35
ब्रिटेन ने कैसे स्पेनिश फ्लू से ईरान में जातीय सफाया किया था? इस बार अपने देश के  लिए भयानक योजना...

स्पैनिश फ्लू कि जिसे ईरान में " फिरंगी ज़ुकाम" कहा जाता था, ब्रिटिश सैनिकों के साथ ईरान आया और लगभग दस लाख लोगों की जान चली गयी।

ईरान प्रथम विश्व युद्ध में ईरान ने अपनी निष्पक्षता की घोषणा की थी लेकिन ईरान को विदेशी सैनिकों से इस युद्ध के दौरान बहुत अधिक नुक़सान पहुंचा।

सब से बड़ी नुक़सान यह हुआ कि " महाअकाल" की वजह से  ईरान की 40 प्रतिशत आबादी मौत की नींद सो गयी। ईरानी इतिहासकारों का मानना है कि ईरान प्रथम विश्व में शामिल नहीं था लेकिन सब से अधिक उसे ही इस युद्ध से नुक़सान पहुंचा है।

ब्रिटेन और रूस के सैनिक, उत्तर और दक्षिण से ईरान में घुस गये और इन्होंने ईरान में पैदा हुए अनाज और गल्ले पर क़ब्ज़ा कर लिया जिसकी वजह से पूरे ईरान में भुखमरी फैल गयी और, भूख, कुपोषण और उनसे पैदा होने वाली बीमारियों की वजह से ईरान की चालीस फीसद आबादी काल के गाल में समा गयी, लेकिन बात यही पर खत्म नहीं हुई और " स्पेनिश फ्लू " ने भी बड़े पैमाने पर तबाही मचायी। इसका वायरस विदेशी सैनिक ईरान लेकर आए थे। कुछ इतिहासकारों का कहना है प्रथम विश्व के अंत के निकट विदेशी सैनिकों द्वारा ईरान लाए गये इस वायरस ने उस समय ईरान की आबादी के दस से पच्चीस फीसद लोगों की जान ले ली थी अर्थात इस वायरस की वजह से ईरान में उस समय नौ लाख से लेकर पच्चीय लाख लोग मारे गये थे।  

ईरान के दक्षिण में स्थित शीराज़ नगर में एक महीने में इस नगर के बीस प्रतिशत लोग मर गये। लोग भूख की वजह से हर चीज़ खा रहे  थे जो भी मिल जाता खा लेते। स्पेनिश फ्लू हवा से तेहरान भी पहुंच गया था। तेहरान में तबाही फैल गयी कहते हैं कि 90 प्रतिशत लोग प्रभावित हुए थे, तेहरान में हर ओर सन्नाटा था।

स्पेनिश फ्लू विदेशी सैनिक ईरान लाए थे हालांकि उसका नाम स्पेनिश फ्लू है मगर वह अमरीका से शुरु हुआ था। वैसे तो दुनिया के एक तिहाई लोग इस वायरस से प्रभावित हुए थे लेकिन ईरान में सब से अधिक लोग मरे थे उसकी वजह यह थी कि जब ब्रिटिश सैनिक ईरान में इस वायरस के साथ आए तो ईरान में भुखमरी फैल चुकी थी जिसकी वजह से भुखमरी से बचे हुए लोग भी काफी कमज़ोर थे।

ईरान में भुखमरी भी ब्रिटेन की वजह से  आयी थी, चरस का बाज़ार भी ईरान ब्रिटेन की वजह से बना था और स्पेनिश फ्लू भी ब्रिटिश सैनिक ही ईरान लेकर आए थे। इस तरह से बड़ी संख्या में ईरानी मारे गये, ब्रिटिश सैनिक अच्छे खान पान की वजह से बहुत कम संख्या में मरे थे।

अब कोरोना वायरस फैला है पूरी दुनिया में, सुना है ब्रिटेन में यह फैसला किया गया है कि युवाओ को बचाया जाए और वृद्धों को ... अब कहां तक सही है लेकिन यह हक़ीक़त है कि ब्रिटेन और साम्राज्यवादी शक्तियों ने अपने हितों के लिए न दूसरों पर रहम किया और न ही अपनों पर ! डेली टेली ग्राफ ने लिखा है कि इटली के अधिकारियों ने फैसला किया है कि कोरोना में ग्रस्त 80 वर्ष से अधिक आयु को लोंगो  का उपचार न किया जाए मतलब उन्हें मरने के लिए छोड़ दिया जाए।