सूरए अहज़ाब की आयत क्रमांक 7 और 8 का अनुवादः
और (याद कीजिए उस समय को) जब हमने पैग़म्बरों से वचन लिया और आपसे (भी) और नूह, इब्राहीम, मूसा और मरयम के बेटे ईसा से भी। हमने इन सबसे दृढ़ वचन लिया ताकि (ईश्वर प्रलय में) सच्चों से उनकी सच्चाई के बारे में पूछे। और काफ़िरों के लिए तो उसने अत्यंत पीड़ादायक दंड तैयार कर रखा है।
संक्षिप्त टिप्पणी:
जो लोग ईश्वर को दिए गए वचनों और उससे की गई प्रतिज्ञाओं के संबंध में सच्चे हैं और ईश्वरीय धर्म की रक्षा के अपने वादे पर डटे हुए हैं, वे सच्चे हैं और अपनी सच्चाई के लिए पारितोषिक प्राप्त करेंगे।
इन आयतों से मिलने वाले पाठ:
- ईमान वालों के लिए पैग़म्बरों व पिछली जातियों के इतिहास से अवगत होना ज़रूरी है ताकि वे उनके बारे में ईश्वर की परंपराओं को जान सकें और सही मार्ग पर क़दम बढ़ा सकें।
- ईश्वर ने हर अधिकार के मुक़ाबले में एक दायित्व रखा है।
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किसी व्यक्ति का पद व स्थान जितना ऊंचा होगा और उसके जितने अधिक अधिकार प्राप्त होंगे, उसके दायित्व भी उतने ही भारी होंगे।
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कथन और व्यवहार में सच्चाई, ईमान का अटूट अंग है और यह बात इतनी अटल है कि ईश्वर ने शब्द "ईमान वाले" के "बजाए सच्चे" प्रयोग किया है।
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ईश्वर प्रलय में लोगों की नीयत और भावना के आधार पर लोगों के कर्मों को परखेगा और वहां कर्मों के विदित स्वरूप के साथ ही उनकी वास्तविक भावना पर भी ध्यान दिया जाएगा।