डेविड एक्स ने लिखा था कि अब जब कि फार्स की खाड़ी में तनाव बढ़ रहा है बेहतर है हम यह याद दिलाएं कि सन 2002 में पेंटागन ने ईरान के साथ युद्ध का अभ्यास किया था जिसके दौरान अमरीकी नौसेना के कुछ सैनिकों ने ईरानी कमांडरों की भूमिका निभाते हुए अमरीकी सेना से युद्ध किया था।
मिलेनियम चैलेंज 2002 के नाम से किये जाने वाले इस युद्धाभ्यास में जनरल पॉल वेन रेपर के नेतृत्व में एक सेना बनायी गयी थी जिसके सैनिक, युद्धपोत और विमान , शक्ति व क्षमता के लिहाज़ से ईरानी सेना की भांति थे। ऐसा इस लिए किया गया था ताकि ईरानी सेना जैसी शक्ति रखने वाली इस सेना से अमरीकी सेना युद्ध करे और फिर देखे कि उसका नतीजा क्या निकलता है और यह भी पता चल पाए कि युद्ध की दशा में ईरानी सैनिक क्या कर सकते हैं?
ईरान के साथ इस युद्ध के अभ्यास की तैयारी दो बरसों तक चली थी और इस में 13500 से अधिक सैनिकों ने हिस्सा लिया था जबकि अभ्यास में 82 युद्धक विमानों और कई प्रकार के सैन्य साधनों को प्रयोग किया गया था।
दो बरसों की तैयारी के बाद जब ईरान से युद्ध का यह अभ्यास आरंभ हुआ तो उसका परिणाम चौंका देने वाला था।
इस युद्ध में जनरल रैपर ईरानी कमांडर की भूमिका में थे। उन्होंने तेज़ी से ईरान की ओर बढ़ते अमरीकी युद्धपोतों और नौसेना के बेड़ों पर ईरानी स्पीड बोट्स जैसी बोट्स और नीची उड़ान भरने वाले ईरानी युद्धक विमानों की मदद से, हमला करने का आदेश दिया, मात्र दस मिनट में सब कुछ खत्म हो गया। ईरानी कमांडर का रोल अदा करने वाले जनरल वेन रेपर युद्ध जीत चुके थे।
यह परिणाम अमरीकी सेना के लिए इतना चौंका देने वाला था कि सेना के कमांडरों ने युद्धाभ्यास में हस्तक्षेप करके ईरानी कमांडर की भूमिका निभाने वाले जनरल वेन रैपर से कहा गया कि वह अपने युद्धपोतों की संख्या कम करें और इसी प्रकार उन्हें कई निर्देश दिये गये और जब उन्होंने इसकी शिकायत अपने कमांडर से की तो उनसे कहा गया कि आप, ईरानी कमांडर की भूमिका से आगे बढ़ रहे हैं, दुश्मन का कमांडर वह सब कुछ नहीं करेगा जो आप कर रहे हैं। इस तरह से अमरीकी सेना ने ईरान के खिलाफ युद्धाभ्यास का परिणाम अपने हित में करने का प्रयास किया।
डेविड एक्स ने नेशनल इन्ट्रेस्ट में अपने लेख में लिखा था कि वास्तविक युद्ध में कोई अमरीका को जिताने के लिए, रणनीति बदलने का आदेश नहीं दे सकता। अगर वास्तव में ईरान जनरल वेन रैपर की रणनीति के अनुसार अमरीकी नौसेना पर हमला करता है तो निश्चित रूप से उसका नुक़सान, इस युद्धाभ्यास में वेन रेपर के सैनिकों द्वारा पहुंचाए गये नुक़सान से कहीं अधिक विनाशकारी होगा।