1 जनवरी 2020 - 13:11
ट्रम्प ने खोल दिया अपने सैनिकों के लिए नर्क का दरवाज़ा ... ईरान से अपने ड्रोन विमान का बदला क्यों नहीं लिया अमरीका ने? यह रहा जव

अरब जगत के प्रसिद्ध पत्रकार और वरिष्ठ लेखक अब्दुलबारी अतवान ने लंदन से प्रकाशित होने वाले समाचार पत्र रायुल यौम में इराक़ में इस देश के स्वंय सेवी बल पर अमरीकी हमले और उसके बाद के परिणामों का जायज़ा लिया है।

इराक़ की स्वतंत्रता और सद्दाम की सत्ता गिराने तथा 4 हज़ार सैनिकों की जान गंवाने और 33 हज़ार सैनिकों के घायल होने और 6 हज़ार अरब डॅालर खर्च करने के बाद आज अमरीका फिर वहीं खड़ा है जहां से उसने इराक़ की अपनी यात्रा आरंभ की थी, आज वह बगदाद में अपना दूतावास भी बचा पाने की ताक़त नहीं रखता जो पूरी दुनिया का सब से बड़ा दूतावास कहा जाता है। 

मंगलवार को हज़ारों इराक़ियों और स्वंय सेवी बल के समर्थकों ने बगदाद के ग्रीन ज़ोन में स्थित अमरीकी दूतावास का रुख किया, फिर उसके दरवाज़े खोल कर वह सब अंदर  घुस गये। यह वास्तव में इराक़ी स्वंय सेवी बल में शामिल कताएब हिज़्बुल्लाह पर अमरीकी युद्धक विमानों के हमले पर जन आक्रोश और प्रदर्शन था। इस हमले में 25 लोग शहीद और दसियों घायल हुए थे। 

ध्यान योग्य बात यह है कि अमरीकी युद्धक  विमानों ने ईरान द्वारा अमरीका के ग्लोबल हॅाक ड्रोन  विमान को मार गिराए जाने के बाद ईरान में कोई कार्यवाही नहीं की लेकिन इराक़ में किरकूक के निकट एक अमरीकी छावनी पर राकेट हमले में मारे जाने वाले एक अमरीकी ठेकेदार का बदला लेने के लिए तत्काल इराक  के कताएब हिज़्बुल्लाह पर बमबारी कर दी। 

इसकी  वजह बेहद साधारण है। वजह यह है कि ट्रम्प सरकार ईरान के खिलाफ प्राक्सी वॅार वह भी केवल इराक़ में चाहती है कम से कम इस समय तो यही हाल है। ट्रम्प की सरकार इराक़ में ही ईरान  से इस  लिए दो - दो हाथ करना चाहती है ताकि वह ईरान की जवाबी कार्यवाही से बची रहे क्योंकि उसे मालूम है कि ईरान की जवाबी कार्यवाही भयानक होगी। इसके साथ ही ट्रम्प की सरकार को मालूम है कि ईरान की जवाबी कार्यवाही के बाद एक भयानक युद्ध  छिड़ सकता है जिसका अधिक नुक़सान अमरीका को होगा। 

अस्ल में अमरीकी सैन्य उद्योग का ताज कहे जाने वाले " ग्लोबर हॅाक " को उतनी ऊंचाई पर जिस तरह से सटीक निशाना लगा कर ईरान ने मार गिराया उससे अमरीकियों के दिल में डर बैठ गया है। अमरीका को यह पता है कि ईरानी मिसाइल न जाने कैसे कैसे  चमत्कार दिखा सकते हैं। 

हमें तो यह विश्वास नहीं है कि अमरीकी हमले के जवाब में स्वंय सेवी बल मात्र इस प्रकार के प्रदर्शनों पर ही संतोष करेगा बल्कि हमें लगता है कि इराक़ के उत्तर और पश्चिम में अमरीकी सैनिकों को दर्दनाक राकेट हमलों  का सामना करना पड़ेगा जहां अमरीका के 5200 से अधिक  सैनिक तैनात हैं। 

ट्रम्प ने इराक़ के " कताएब हिज़्बुल्लाह " पर हमला करवा के अपने सैनिकों और अपने देश के हितों को नर्क में झोंक दिया है और यह नर्क केवल इराक़ में नहीं है बल्कि पूरे फार्स की खाड़ी में जगह जगह यह नर्क मुंह खोले मौजूद है। क्योंकि ट्रम्प इराक़ियों को जानते ही नहीं और न ही उन्हें यह  मालूम है कि यह इराक़ी संगठन अपने देश में कैसे लड़ते हैं और न ही ट्रम्प, अपने से पहले के  अमरीकी राष्ट्रपति बाराक ओबामा  की हार से कुछ सीखने पर तैयार हैं जिसकी वजह से वह सन 2011 में सभी अमरीकी सैनिकों को इराक़ से वापस बुलाने पर मजबूर हो गये थे। 

आज का इराक़, 13 साल पहले भुखमरी के शिकार इराक़ की तरह नहीं है जिसने सन 2003 में अमरीकी अतिक्रमण का मुकाबला नहीं किया  था। आज का इराक़ मज़बूत है और क्षेत्र के बेहद मज़बूत प्रतिरोध मोर्चे का भाग है। उसके पास पांच लाख से अधिक छोटे बड़े मिसाइल हैं। 

जिस तरह से सन 2011 ने अमरीका की हार लिखी थी और अमरीकियों को इराक़ से भागना पड़ा था उसी तरह हमारे  ख्याल में सन 2020 भी अमरीकी की दूसरी पराजय का साल होगा और इराक़ व सीरिया से 6 हज़ार अमरीकी सैनिक भाग जाएंगे।