सोशल मीडिया पर वायरल तस्वीरों और वीडियो फ़ुटेज देखने के बाद इसका अंदाज़ा लगाया जा सकता है कि यह पुलिसकर्मी किसके इशारे पर और क्यों यह हरकत कर रहे हैं जबकि पुलिसकर्मियों की हकरतों का बचाव वरिष्ठ अधिकारी करते नज़र आ रहे हैं।
नागरिकता संशोधन क़ानून के खिलाफ प्रदर्शन के दौरान हुई हिंसा के संबंध में उत्तर प्रदेश के बिजनौर शहर में पुलिस ने बड़ी संख्या में लोगों को हिरासत में लिया जिसमें 13 साल के एक किशोर समेत कई नाबालिग़ भी शामिल थे।
नाबालिग़ों और अन्य लोगों को बिजनौर पुलिस लाइन ले जाया गया था जहां उन्हें बहुत ही अमानवीय तरीके से पीटा गया, ठंड में रखा गया, भोजन भी नहीं दिया गया और तरह-तरह से उन्हें डराया धमकाया गया।
बिजनौर के नगीना क़स्बे में बीते 20 दिसम्बर को जुमे की नमाज़ के बाद लगभग 300 लोग शहर के बीच में स्थित गांधी मूर्ति चौक की तरफ बढ़ रहे थे। वो लोग नागरिकता संशोधन क़ानून के ख़िलाफ़ प्रदर्शन कर पुलिस को ज्ञापन देना चाहते थे।
स्थानीय लोगों के अनुसार, मौलगंज बाज़ार में पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को रोकना शुरू कर दिया। इसी दौरान पुलिस से उनकी झड़प हो गई। लोग पथराव करने लगे और पुलिस ने लाठीचार्ज कर दी। इसके बाद पुलिस ने लगभग 100 लोगों को हिरासत में लिया और उन्हें नगीना से 35 किलोमीटर बिजनौर शहर के सिविल लाइन ले जाकर रखा गया।
दो दिन बाद कुल 21 लोगों को छोड़ा गया और 79 लोगों को गिरफ़्तार कर कुल 83 लोगों के ख़िलाफ आईपीसी की धारा 307 समेत कुल 15 विभिन्न धाराओं के तहत केस दर्ज किया गया है।
13 वर्षीय सलीम (नाम बदला हुआ) की बहन ग़ुस्से से कहती है कि देख लो कितना मारा है पुलिसवालों ने। इनके बच्चे नहीं हैं क्या? क्या ये अपने बच्चों को भी ऐसे ही पीटते होंगे? मेरा भाई इतना डर गया है कि वह रात में जाग-जागकर डर के मारे चिल्लाने लगता है।
सलीम बताता है कि 20 दिसम्बर को वह अपने छोटे भाई को खाना खिलाने के लिए बाहर बुलाने गया था। उसने वहां पर देखा तो हंगामा हो रहा था, तो वह डर के मारे बैंक की छत पर जाकर खड़ा हो गया। पुलिस ने दो डंडे मारकर वहां से उसे पकड़ लिया।
सलीम की मां कहती है कि मेरा बेटा प्यासा था तो पुलिसवालों ने उसे पहले पानी पिलाया। बाद में उसे पेशाब लगा तो पुलिस वाले इस बहाने उसे बाहर ले गए और उसे डंडों से बहुत ज़्यादा मारा। मारते हुए ले गए और मारते हुए लेकर आए।
उनका कहना था कि दो पुलिसवालों ने उसके दोनों हाथ दोनों तरफ से पकड़े और उसे दीवार की तरफ खड़ा कर दिया। इसके बार एक तीसरे पुलिसकर्मी ने उसे लाठी से बहुत पीटा। उन्होंने उसका बाल पकड़कर कर घसीट-घसीट कर पीटा। दूसरे मुसलमानों की वो दाढ़ी खींचते थे। मामला यहीं पर ख़त्म नहीं हुआ बल्कि अन्य नाबालिग़ों को भी पुलिसकर्मियों ने बुरी तरह पीटा।