24 दिसंबर 2019 - 13:29
व्यापक आंदोलन की आग को ठंडा करने के लिए मोदी ने लगाया 'विविधता में एकता, भारत की विशेषता' का नारा, लेकिन क्या यह आरएसएस की विचार

भेदभावपूर्ण और विभाजनकारी नागरिकता संशोधन क़ानून (CAA) और नेश्नल रजिस्टर ऑफ़ सिटिज़ंस (NRC) के ख़िलाफ़ देश व्यापी आंदोलन शुरू होने के बाद, भारतीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने लोगों को यह आश्वस्त करने की कोशिश की है कि यह क़ानून मुसलमानों के ख़िलाफ़ नहीं है, बल्कि विपक्षी पार्टियां ऐसा भ्रम फैला रही हैं।

धर्म के आधार पर नागरिकता क़ानून के पारित होने के बाद, 12 दिसम्बर को असम और मेघालय में इसके ख़िलाफ़ प्रदर्शन शुरू हुए, जो अब पूरे देश में फैल चुके हैं और यह विरोध एक व्यापक आंदोलन का रूप ले चुका है।

रविवार को मोदी ने नई दिल्ली में बीजेपी की एक रैली को संबोधित करते हुए दावा किया कि उनकी सरकार कोई भी फ़ैसला किसी तरह के भेदभाव के आधार पर नहीं करती है और जो लोग यह कह रहे हैं कि नया नागरिकता क़ानून भेदभाव करता है तो मैं उन्हें चुनौती देता हूं, वह यह साबित करें।

बीजेपी की यह रैली फ़रवरी में दिल्ली में होने वाले विधान सभा चुनावों के प्रचार की शुरूआत के लिए आयोजित की गई थी, लेकिन देश की सड़कों पर विरोध की फैली हुई आग को देखते हुए मोदी जल्दी ही इस क़ानून के बचाव में उतर आए।

नागरिकता क़ानून और एनआरसी के ख़िलाफ़ विरोध प्रदर्शनों के दौरान, अब तक 25 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है और हज़ारों की संख्या में लोग घायल हैं।

मोदी ने मुसलमानों को भरोसा दिलाने की कोशिश करते हुए दावा कियाः यह क़ानून 1.3 अरब भारतीयों में से किसी को प्रभावित नहीं करता है। मैं भारत के मुसलमानों को भरोसा दिलाना चाहता हूं कि इस क़ानून का उनकी स्थिति पर कोई फ़र्क़ नहीं पड़ेगा।

उन्होंने रामलीला मैदान में आयोजित रैली में अपने संबोधन की शुरुआत ही 'विविधता में एकता, भारत की विशेषता' के नारे लगवाकर की।

इससे साफ़ ज़ाहिर है कि मोदी सरकार आर्थिक मंदी का सामना कर रहे देश में जारी आंदोलन के कारण पूरी तरह से बैकफ़ुट पर आ गई है। इसलिए कि मोदी आरएसएस की जिस विचारधारा को फ़ॉलो करते हैं, वह विविधता में एकता पर विश्वास नहीं रखती है, बल्कि इसके विपरीत भारत को हिंदू राष्ट्र बनाने पर तुली हुई है।

मोदी ने मुख्य विपक्षी पार्टी कांग्रेस पर देश भर में भ्रम और डर फैलाने का आरोप भी लगाया। उन्होंने कहा वे मुझे सत्ता से हटाने के लिए हर चाल चल रहे हैं।

इस बीच, रविवार को भी नई दिल्ली स्थित जामिया मिल्लिया इस्लामिया समेत देश भर में विरोध प्रदर्शनों का सिलसिला जारी रहा।

हालांकि प्रदर्शनों को रोकने के लिए सरकार ने कई राज्यों में धारा 144 लगा दी है और इंटरनेट सेवाएं बंद कर दी हैं, जगह जगह पुलिस प्रदर्शनकारियों पर अत्यधिक बल प्रयोग कर रही है,  लेकिन इसके बावजूद बड़ी संख्या में लोग अपने घरों से बाहर निकलकर मोदी सरकार की नीतियों का विरोध कर रहे हैं।

विरोध प्रदर्शनों में हर धर्म के मानने वाले बड़ी संख्या में भाग ले रहे हैं, लेकिन मुसलमानों की संख्या सबसे ज़्यादा है।