प्राप्त रिपोर्ट के मुताबिक़, अलमुस्तफ़ा विश्वविद्यालय के छात्रों ने ईरान के पवित्र नगर मशहद में भारतीय सरकार द्वारा लाए गए विवादित नए नागरिक संशोधन क़ानून के विरुद्ध प्रदर्शन किया। मशहद में रहे रहे भारत के विभिन्न राज्य के छात्रों ने अपने देश के लिए अपनी वफ़ादारी को दिखाते हुए, भारतीय संविधान के ख़िलाफ़ बने सीएए के ख़िलाफ़ प्रदर्शन किया।
प्रदर्शनकारियों को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने कहा कि सीएए और एनआसी भारत की गंगा-जमुना संस्कति के लिए हानिकारक है और इससे देश की शांति व सुरक्षा ख़तरे में पड़ जाएगी। वक्ताओं ने कहा कि भारत का संविधान किसी को इस बात की इजाज़त नहीं देता के वह धर्म के आधार पर कोई क़ानून बनाए जो देश के लोगों को जोड़ने के बजाए उन्हें आपस में बांटने का काम करे। ईरान के पवित्र नगर मशहद में रहने वाले भारतीय छात्रों ने एकमत होकर विवादित नए नागरिकता संशोधन क़ानून और एनआरसी की कड़े शब्दों में निंदा की और मोदी सरकार से मांग की वे इस ग़ैर संवेधानिक क़ानून का वापस लें।
उल्लेखनीय है कि इससे पहले ईरान के ही पवित्र नगर क़ुम में, जो अलमुस्तफ़ा विश्वविद्यालय का मुख्य केंद्र है, वहां भी सैकड़ों की संख्या में भारतीय छात्रों ने एकत्रित होकर भारत की मोदी सरकार द्वारा लाए गए विवादित नए नागरिकता संशोधन क़ानून और एनआरसी के ख़िलाफ़ ज़बरदस्त विरोध-प्रदर्शन किया था। ईरान में भारती छात्रों के संगठन ने एलान किया है कि वह जल्द ही ईरान की राजधानी तेहरान में स्थित भारतीय दूतावास के सामने हज़ारों की संख्या में एकत्रित होकर इस विवादित क़ानून के ख़िलाफ़ विरोध-प्रदर्शन करेंगे।
दूसरी ओर ब्रिटेन, अमेरिका और फ्रांस सहित कनाडा के प्रसिद्ध विश्वविद्यालय ब्रिटिश ऑफ कोलंबिया में भी छात्रों ने सीएए, एनआरसी और जामिया मिल्लिया एवं अलीगढ़ विश्वविद्यालयों के छात्रों पर पुलिस द्वारा की गई बरबर्ता के ख़िलाफ़ विरोध-प्रदर्शन किया। छात्रों ने कहा कि हम अपने देश के संविधान के विपरीत किसी भी क़ानून को स्वीकार नहीं करेंगे। यूबीसी के छात्रों ने ऐसे प्लेकॉर्ड भी अपने हाथों में उठा रखे थे कि जिसपर भारत के संविधान निर्माता बाबा साहब भीम राव अंबेडकर द्वारा कही गई बातों को कोड किया गया था और साथ ही जामिया मिल्लिया एवं अलीगढ़ विश्वविद्यालय के छात्रों के साथ अपनी संवेदना एवं समर्थन का एलान किया।