जब से लेबनान में विरोध प्रदर्शन शुरु हुए हैं, हिज़्बुल्लाह ने जनता की वैध मांगों का समर्थन और सरकार के इस्तीफ़ा देने का विरोध किया। लेबनानी प्रधान मंत्री साद हरीरी के इस्तीफ़े के 45 दिन गुज़रने के बाद सय्यद हसन नसरुल्लाह ने एक बार फिर सरकार के इस्तीफ़े को ग़लती क़रार देते हुए कहा कि इस इस्तीफ़े से वक़्त बर्बाद हुआ और सरकारी संस्थाएं बंद रहीं। इसके साथ ही उन्होंने बल दिया कि हिज़्बुल्लाह लेबनान में ऐसी सरकार के गठन का समर्थन करेगा जिसमें सभी को भागीदारी मिले।
हसन नसरुल्लाह के भाषण का दूसरा अहम आयाम इस देश में नई सरकार के गठन की प्रक्रिया में अमरीका के हस्तक्षेप पर आधारित था। नसरुल्लाह की नज़र में इस चरण में अमरीकियों की कोशिश तेज़ हो गयी है क्योंकि एक ओर वे चाहते हैं कि लेबनान में ऐसी सरकार बने जो वॉशिंग्टन के हितों से समन्वित हो और दूसरी ओर वे लेबनान को अमरीकी मदद का दावा कर रहे हैं, हालांकि अमरीका की लेबनान को मदद का मतलब हिज़्बुल्लाह को राजनैतिक प्रक्रिया से निकालना है।
तीसरा आयाम अमरीका के लेबनान और इराक़ के प्रदर्शनों की लहर पर सवार होने की कोशिश पर आधारित है। इस संबंध में अमरीकियों ने दो टैक्टिक अपनायी। एक राजनैतिक असंतुष्टों और आंतरिक तत्वों की मदद से यह दर्शाएं कि इराक़ और लेबनान में प्रदर्शन के पीछे आर्थिक आयाम नहीं बल्कि ईरान विरोधी भावना है, जिसके बारे में हसन नसरुल्लाह ने कहा कि लेबनान में प्रदर्शन ईरान विरोधी नहीं है बल्कि आर्थिक अधिकार को लेकर ये प्रदर्शन हुए।
अमरीकियों की दूसरी टैक्टिक यह है कि वे प्रदर्शनों को ईरान पर उसकी क्षेत्रीय नीति को बदलने के लिए दबाव डालने के लिए इस्तेमाल करना चाहते हैं।
चौथा आयाम हिज़्बुल्लाह की क्षेत्रीय ताक़त के उल्लेख पर आधारित था। इस बारे में हिज़्बुल्लाह के महासचिव ने कहा कि यह जो कहा जा रहा है कि हिज़्बुल्लाह ज़ायोनियों के हितों के लिए ख़तरा है, यह बात सही है और हमें इस पर गर्व है। दूसरे यह कि अगर ईरान पर हमला होता है तो उसे अपनी रक्षा के लिए क्षेत्रीय घटक की ज़रूरत नहीं है बल्कि ख़ुद अकेले ईरानी हमले का जवाब देंगे।
अंत में यह कि सय्यद हसन नसरुल्लाह का बयान दर्शाता है कि अमरीकियों और उनके घटकों ने लेबनान और इराक़ की अशांति से बड़ी उम्मीद लगा रखी है और वे इन देशों में जनता के ख़िलाफ़ हिंसा तेज़ करना चाहते हैं और इस काम के लिए वे अपने किराए के टट्टुओं को इस्तेमाल कर रहे हैं।