11 दिसंबर 2019 - 16:15
आयत क्या कहती है? वह उन सभी को सूली पर चढ़ा देगा और उनके बाएं पैर और दाहिने हाथ को काट देगा ताकि दूसरों के लिए पाठ रहे।

किंतु उसकी इन धमकियों का कोई प्रभाव नहीं हुआ क्योंकि जादूगरों का ईमान, सच्चा और दिल से था तथा शारीरिक यातनाएं देकर उनके ईमान को न तो कमज़ोर किया जा सकता था और न ही उन्हें उनके ईमान से पलटाया जा सकता था।

सूरए ताहा की आयत क्रमांक 71 का अनुवादः

फ़िरऔन ने (जादूगरों से) कहाः क्या तुम मूसा पर मेरे अनुमति देने से पहले ही ईमान ले आए? निश्चित रूप से यह तुम सबका प्रमुख है जिसने तुम्हें जादू सिखाया है। तो अब मैं तुम्हारे हाथ और पाँव विपरीत दिशाओं से कटवा दूँगा और तुम्हें खजूर के तनों पर सूली दे दूँगा। तब तुम्हें अवश्य ही ज्ञात हो जाएगा कि हममें से किसका दंड अधिक कठोर और स्थायी है।

 

संक्षिप्त टिप्पणी:

आरोप और धमकी, सत्य और वास्तविकता के पालनकर्ताओं के संबंध में फ़िरऔनी शासनों का सबसे प्रचलित हथकंडा है।

 

इस आयत से मिलने वाले पाठ:

  1. फ़िरऔनी और अत्याचारी शासन में, आस्था के चयन की स्वतंत्रता नहीं होती और लोगों को शासक के दृष्टिकोण को ही स्वीकार करना पड़ता है।

  2. आरोप और धमकी, सत्य और वास्तविकता के पालनकर्ताओं के संबंध में फ़िरऔनी शासनों का सबसे प्रचलित हथकंडा है।

  3. फ़िरऔनी शासनों में यातनाएं देना और हत्या करना इस प्रकार से प्रचलित है कि शासक उसे बयान करने में संकोच से भी काम नहीं लेते।