20 अक्टूबर 2026 - 20:02
ईरान पर हमला अमेरिका के लिए आत्मघाती चुनौती साबित होगा

डोनाल्ड ट्रंप का ईरान पर ‘मदर ऑफ ऑल बॉम्ब्स’ से हमला करने की धमकी से पीछे हटना संभावित परिणामों के डर को दिखाता है।

तेहरान: पश्चिम एशिया के रणनीतिक मामलों के विश्लेषक अब्दुलबारी अतवान ने ईरान और अमेरिका के बीच संभावित युद्ध को लेकर एक लेख में कई दावे किए हैं। उन्होंने कहा कि हुर्मुज जलडमरूमध्य में ईरान की कार्रवाई अमेरिका के लिए बड़ी चुनौती है। उनके अनुसार, इससे अमेरिका के उन दावों पर सवाल उठते हैं, जिनमें वह इस समुद्री मार्ग पर अपना नियंत्रण होने और यहां व्यापारिक जहाजों की आवाजाही बहाल करने की बात करता है।

अतवान ने दावा किया कि हुर्मुज जलडमरूमध्य में ईरान की सुरक्षा व्यवस्था का पालन किए बिना गुजरने की कोशिश करने वाले 12 बड़े तेल टैंकरों को ईरान ने निशाना बनाया। उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का ईरान पर ‘मदर ऑफ ऑल बॉम्ब्स’ से हमला करने की धमकी से पीछे हटना संभावित परिणामों के डर को दिखाता है।

उनके मुताबिक, ईरान की जनता और सरकार अब अमेरिका और इस्राईल के हमलों से नहीं डरतीं और किसी भी नए हमले का सामना करने के लिए तैयार हैं। अतवान ने दावा किया कि इस्राईल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई तेज करने की कोशिश के पीछे भी डर की भावना है।

अतवान ने कहा कि ईरान की आठ महीने की नाकेबंदी, जिसमें बंदरगाहों को बंद करना भी शामिल था, सरकार को बदलने के अपने कथित उद्देश्य में सफल नहीं हुई। उन्होंने दावा किया कि ईरान की जनता को सड़कों पर विरोध प्रदर्शन के लिए उकसाने की कोशिशें भी नाकाम रहीं।

उनके अनुसार, इसके उलट ईरान में राष्ट्रीय एकता बढ़ी है और जनता का नेतृत्व तथा सरकार के प्रति समर्थन मजबूत हुआ है।

अतवान ने यह भी कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप की ओर से इस्राईल के प्रधानमंत्री नेतन्याहू को इस्राईल के संसदीय चुनाव में समर्थन देने की घोषणा से पता चलता है कि ट्रंप ने अपनी राजनीतिक उम्मीदें नेतन्याहू और उनकी लिकुड पार्टी से जोड़ रखी हैं।

अमेरिका और इस्राईल के संभावित हमले का जिक्र करते हुए अतवान ने दावा किया कि इस तरह के युद्ध में ईरान के सहयोगी संगठन मजबूत होकर उभर सकते हैं।

उन्होंने कहा कि लेबनान का हिज़्बुल्लाह पहले हुए नुकसान से उबर चुका है और अपनी सैन्य क्षमताओं को फिर से मजबूत कर चुका है। उनके मुताबिक, यमन का अंसारुल्लाह पहले से अधिक ताकतवर हुआ है, जबकि इराक की पॉपुलर मोबिलाइजेशन फोर्सेज (हशद अल-शाबी) और फिलिस्तीनी संगठन हमास भी सक्रिय हैं।

अतवान का दावा है कि ये संगठन संभावित युद्ध के लिए तैयार हैं और मौका मिलने पर अपनी कार्रवाई तेज कर सकते हैं।

अतवान ने अपने लेख में कहा कि चाहे अमेरिका और इस्राईल पहले हमला करें या ईरान पहल करते हुए जवाबी कार्रवाई शुरू करे, उनके अनुसार इस संघर्ष में सबसे अधिक नुकसान अमेरिकी-जायोनी गठबंधन को हो सकता है।

उन्होंने ईरान की तेज रफ्तार नौकाओं और समुद्री मिसाइलों का जिक्र करते हुए दावा किया कि ईरान बड़े सैन्य संघर्ष की तैयारी कर रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि ईरान की रणनीति अमेरिकी सैनिकों को अधिकतम नुकसान पहुंचाने और अधिक से अधिक सैनिकों को बंदी बनाने पर केंद्रित हो सकती है।

अतवान ने अमेरिकी युद्धपोतों, विमानवाहक पोतों और जॉर्डन सहित खाड़ी क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों का उल्लेख किया। उन्होंने अफगानिस्तान, इराक, लेबनान और वियतनाम में अमेरिका के पिछले सैन्य अनुभवों का हवाला देते हुए कहा कि क्षेत्र में अमेरिकी सैनिकों को भारी नुकसान पहुंचाना अमेरिका की वापसी का कारण बन सकता है।

अपने लेख के अंत में अतवान ने 2025 के 12 दिवसीय युद्ध का उल्लेख करते हुए दावा किया कि ईरान की क्लस्टर हथियारों वाली मिसाइलों ने तेल अवीव के कई इलाकों को नुकसान पहुंचाया था और लाखों ज़ायोनी अतिक्रमणकारियों को लगातार बंकरों में जाने के लिए मजबूर किया था।

उन्होंने आशंका जताई कि भविष्य में संघर्ष बढ़ने पर हाइफा, तेल अवीव, अश्कलोन, अशदोद और इलात जैसे ज़ायोनी शहरों में भी बड़ी तबाही हो सकती है। उन्होंने इसकी तुलना न्यूयॉर्क के वर्ल्ड ट्रेड सेंटर के ढहने की घटना से की।

अतवान ने कहा कि ऐसी स्थिति में इस्राईल की सैन्य सेंसरशिप के लिए नुकसान की तस्वीरों और जानकारियों को छिपाना मुश्किल हो सकता है।

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