इराकी सूत्रों ने बताया है कि रविवार को दोबारा पवित्र नगर नजफ़ में ईरानी काउंसलेट में आग लगा दी गयी। समाचार एजेन्सी सूमरिया की रिपोर्ट के अनुसार इराक के नजफ़ नगर में ईरानी काउंसलेट में दोबारा आग लगा दी गयी। बुधवार को भी नकाबधारियों के एक गुट ने पवित्र नगर नजफ़ में स्थित ईरानी काउंसलेट में आग लगा दी थी।
नजफ के स्थानीय लोगों का कहना है कि नकाबधारी नजफ के नहीं प्रतीत हो रहे थे। इराकी विदेशमंत्री ने भी गुरूवार को एक विज्ञप्ति जारी करके इस हमले की तीव्र भर्त्सना की थी और ईरान से इसके लिए माफी मांगी थी।
जानकार हल्कों का मानना है कि अमेरिका और सऊदी अरब के इशारे पर इराक में ईरानी काउंसलेट पर हमले हो रहे हैं। इन जानकार हल्कों का मानना है कि अगर ईरान के सैन्य परामर्शदाता अधिकारियों की सहायता न होती तो बहुत पहले पूरे इराक पर आतंकवादी गुट दाइश का काब्ज़ा हो चुका होता।
इन टीकाकारों का मानना है कि ईरानी काउंसलेट पर हमला करने वाले अगर यह कहते हैं कि ईरान इराक के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप कर रहा है जिससे वे क्रोधित हैं तो इसके जवाब यह कहना चाहिये कि पहली बात तो यह है कि ईरान ने इराक सहित किसी भी देश के आंतरिक मामलों में न तो कभी हस्तक्षेप किया और और न ही कर रहा है और रोचक बात यह है कि जब अमेरिका ने कई वर्षों तक पूरे इराक पर कब्ज़ा कर रखा था और उसने हज़ारों इराकियों की हत्या की जिनमें ध्यान योग्य संख्या महिलाओं और बच्चों की है तो उस वक्त इराक़ियों का क्रोध और स्वाभिमान कहां चला गया था? अमेरिकी दूतावास या काउंसलेट पर कभी भी हमला क्यों नहीं हुआ? इन टीकाकारों का मानना है कि अमेरिका और सऊदी अरब सहित कुछ देशों के समर्थन और इशारे से ही इराक में ईरानी काउंसलेट पर हमले हो रहे हैं और हमला कराने वालों का मानना है कि इस प्रकार से वे ईरान और इराक के संबंधों को ख़राब कर सकते हैं और जो लोग ईरानी काउंसलेट पर हमले कर रहे हैं वास्तव में वे अमेरिका और सऊदी अरब के एजेन्ट हैं।