आयतुल्लाह सीस्तानी का यह बयान शुक्रवार को परिवत्र शहर कर्बला में नमाज़े जुमा के दौरान उनके प्रतिनिधि ने पढ़कर सुनाया।
वरिष्ठ शिया धर्मगुरु ने प्रदर्शनकारियों से कहा है कि वह ख़ुद को देश में अराजकता और हिंसा फैलाने वालों से अलग कर लें, इसलिए कि इराक़ी राष्ट्र के दुश्मन देश में अराजकता फैलाकर एक बार फिर जनता पर अपना पिट्ठू तानाशाह थोपना चाहते हैं।
आयतुल्लाह सीस्तानी ने शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों पर हमला करने को भी ग़लत और नाजायज़ क़रार दिया।
बयान में कहा गया है कि इराक़ी जनता को एकजुट होकर दुश्मनों की साज़िश का मुक़ाबला करना चाहिए और उन्हें ऐसा कोई मौक़ा नहीं देना चाहिए कि वह जनता से अधिकार छीनकर सद्दाम की तरह किसी तानाशाह को उनके ऊपर थोप दें।
ग़ौरतलब है कि अक्तूबर के शुरू में इराक़ में बुनियादी सुविधाओं के अभाव और व्यापक भ्रष्टाचार के ख़िलाफ़ विरोध प्रदर्शनों के दूसरे चरण की शुरूआत हुई थी। लेकिन पिछले कुछ दिनों के दौरान इन प्रदर्शनों के बहाने बड़े पैमाने पर सार्वजनिक और निजी संपत्ति को निशाना बनाया गया है और बुधवार क नजफ़ स्थित ईरानी कांसुलेट की पूरी इमारत को आग लगा दी गई।
आयतुल्लाह सीस्तानी ने इराक़ी संसद से भी अपील की है कि वह मौजूदा सरकार के उन विकल्पों की समीक्षा करे, जिसके कारण देश को इन कठिन परिस्थितियों का सामना है और पिछले दो महीनों के दौरान लोगों के अधिकारों की रक्षा करने और रक्तपात को रोकने में ज़िम्मेदार लोग क्यों नाकाम रहे हैं।
इराक़ के वरिष्ठ धर्मगुरू ने संसद से कहा है कि जनता की मांगों के अनुसार, देश में आज़ाद और निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करने वाले क़ानून पारित करे और वह अपने इन प्रयासों में तेज़ी लाए।
इराक़ की संसदीय मानवाधिकार समिति के अनुसार, हिंसक प्रदर्शनों के दौरान देश में अब तक 300 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है।
इराक़ी रक्षा मंत्री का कहना है कि प्रदर्शनकारियों की टारगेट हत्याओं में किसी तीसरे पक्ष का हाथ है।