यह सैनिक सऊदी अरब और इमारात के गठबंधन के लिए किराए के सैनिक के रूप में यमन में लड़ रहे हैं। सैनिकों को यमन भेजने की नीति से सूडान की सेना की छवि को भारी नुक़सान पहुंचा और उसे किराए के सैनिक कहा जाने लगा।
यमन की सेना के प्रवक्ता यहया अस्सरीअ ने एलान किया कि यमन में लड़ने वाले सूडानी सैनिकों को बहुत भारी क़ीमत चुकानी पड़ी है इनमें से 4253 सैनिक मारे गए और लगभग इतने ही सैनिक घायल हुए।
सूडान की सेना ने कहा है कि मरने और घायल होने वाले सूडानी सैनिकों की संख्या इतनी नहीं है लेकिन सूडानी सेना ने कोई आंकड़ा भी जारी नहीं किया। उसने तो यह तक नहीं बताया कि यमन में कितने सैनिक तैनात हैं।
सूडान के पूर्व राष्ट्रपति उमर हसन अलबशीर जो इस समय क़ैदी बन चुके हैं उन पर आरोप है कि उन्होंने सऊदी क्राउन प्रिंस मुहम्मद बिन सलमान से 12 करोड़ डालर व्यक्तिगत रूप से रिश्वत लेकर यमन युद्ध में सूडानी सैनिकों को झोंक दिया जबकि उनके देश का यमन युद्ध से कोई लेना देना नहीं था।
रायुल यौम अख़बार की हैसियत से हम तो यमन की सेना के प्रवक्ता यहया अस्सरीअ के एलान को सही मानते हैं। विशेषकर इसलिए कि इससे पहले वह एक बार और भी तसवीरों और तथ्यों के साथ साबित कर चुके हैं कि यमनी फ़ोर्सेज़ ने नसरुम मिनल्लाह नामक सैनिक आप्रेशन करके 500 सैनिकों को मारा और घायल कर दिया जबकि 2000 सैनिकों को गिरफ़तार कर लिया इनमें सूडानी सैनिक भी शामिल थे। हमने अपनी आंख से सऊदी अरब के बक़ैक़ और ख़रैस तेल प्रतिष्ठानों से आग की लपटें निकलती देखीं और यह सब कुछ यमनियों के हमलों के नतीजे में हुआ।
यमन युद्ध में भारी जानी नुक़सान के कारण ही इमारात ने इस युद्ध से अपने अधिकतर सैनिकों को बाहर निकाल लिया ताकि अब और नुक़सान न झेलना पड़े और यमन कहीं सऊदी अरब की तरह इमारात के तेल प्रतिष्ठानों पर भी हमले शुरू न कर दे। सवाल यह है कि सूडान इससे क्यों पाठ नहीं ले रहा है, अपने सैनिक यमन से वापस क्यों नहीं बुला रहा है विशेषकर इसलिए भी कि यमन युद्ध में सऊदी अरब और इमारात की जीत अब असंभव बन चुकी है। छह साल में हमलावर देशों को हर स्तर पर नुक़सान ही उठाना पड़ा है।
सूडानी सैनिक नेतृत्व को जो अब सत्ता में भी शामिल है पारदर्शिता बरतते हुए मरने और घायल होने वाले सूडानी सैनिकों की सही संख्या बताना चाहिए और इस निरर्थक युद्ध से अपने सैनिकों को तत्काल बाहर निकाल लेना चाहिए। हम नहीं चाहते कि सूडानी सेना यमन युद्ध की दलदल में डूबती जाए जहां एक लाख से अधिक लोग मारे जा चुके हैं। हम यह भी मांग करते हैं कि इस युद्ध में सूडान के लिप्त होने के पूरे प्रकरण की पूरी पारदर्शिता के साथ जांच की जाए और ज़िम्मेदारों के नाम सामने आएं।
साभार रायुल यौम