सूरए ताहा की आयत क्रमांक 3 और 4 का अनुवादः
(हमने क़ुरआन को ईश्वर से) डरने वालों के लिए (उसे) याद दिलाने का माध्यम बना कर ही उतारा है। (यह क़ुरआन) उसकी ओर से क्रमशः उतारा गया है जिसने धरती और ऊंचे आकाशों की रचना की है।
संक्षिप्त टिप्पणी:
क़ुरआने मजीद की आयतें मनुष्य को स्वाभाविक वास्तविकताओं की याद दिलाती हैं और उसे सांसारिक मामलों में लिप्त होने के कारण उत्पन्न होने वाली निश्चेतना से बाहर निकालती हैं।
इस आयत से मिलने वाले पाठ:
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मनुष्य को सदैव इस बात की आवश्यकता है कि कोई उसे ईश्वर की याद दिलाता रहे और क़ुरआने मजीद इसका उत्तम साधन है।
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क़ुरआने मजीद से वही लोग लाभान्वित होते हैं जो अपने मन में पापों की ओर से चिंतित रहते हैं, दायित्व का आभास करते है तथा बुराइयों से दूर रहना चाहते हैं।
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क़ुरआन को भेजने वाला, सृष्टि का रचयिता है।
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धर्म व संसार दोनों का रचयिता एक ही है।